आदियोगी के दरबार में पहुंचे आदिवासी और वनवासी, पारम्परिक वाद्ययंत्रों की धुन पर नृत्य कर लिया बाबा का आशीर्वाद

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। मंदिरों में भेदभाव और छुआछूत को दूर करने के उद्देश्य से काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के तहत देश भर के अलग-अलग इलाकों से आए हुए आदिवासी और वनवासी समुदाय के लोगों का भव्य स्वागत करते हुए उन्हें गर्भ गृह में ले जाकर बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन करवाए। देश के आदिवासी और जनजातीय इलाकों से आए हुए इन जनजातीय समुदाय के लोगों ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में माथा टेका और बाबा विश्वनाथ के दर्शन पाकर अभिभूत दिखे।
पारम्परिक वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य करते बाबा दरबार मे किया प्रवेश
जनजाति सुरक्षा के बैनर तले देश भर के अलग-अलग इलाकों से आए हुए आदिवासी बनवासी और जनजाति समूह के करीब 1200 लोगों ने आज काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन किया। पारंपरिक वाद्य यंत्र मानव भजन और घुंघरू की थाप पर पारंपरिक नृत्य करते हुए जनजाति समूह के इन लोगों ने गंगाधर से विश्वनाथ कॉरिडोर में प्रवेश किया।
प्रवेश करने के साथ ही इन पर मंदिर प्रशासन की तरफ से पुष्प वर्षा की गई। मंदिर चौक पर काफी देर तक जनजातीय समूह के लोगों ने अपने पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन करते हुए बाबा विश्वनाथ की स्तुति की। उसके बाद इन सभी लोगों को गर्भग्री में ले जाकर बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन कराया गया।
धर्मांतरण किए हुए लोगों को जनजाति समूह से किया जाए बाहर
जनजाति सुरक्षा मंच का प्रदेश महामंत्री देव नारायण खरवाल ने कहा कि हम सभी बाबा के धाम में दर्शन पूजन कर बाबा से प्रार्थना की है कि हमारे समाज के लोगों को बाबा सद्बुद्धि दे। वहीं उन्होंने कहा कि हम सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से सरकार से मांग करते हैं कि धर्मांतरण कर चुके लोगो को जनजातीय सूची से बाहर कर जनजातीय समाज के साथ न्याय किया।
देव नारायण खरवार ने कहा कि जनजाति समूह भी सनातन परंपरा को मानने वाले लोग हैं। लेकिन धर्मांतरण के खेल में उनका धर्म नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। आज हमने बाबा दरबार में हाजिरी लगाकर जनजाति समूह के अपनी परंपराओं के संरक्षण और संवेदन की कामना की है।

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