शादी-विवाह में क्यों होती है शगुन देन-लेन की प्रथा, जानें इसका कारण और महत्व
Shagun: हिंदू धर्म में शादी-विवाह या किसी शुभ कार्य में क्यों शगुन का लेन-देन होता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
Shagun: सनातन धर्म में आपने अक्सर देखा होगा किसी की विदाई के दौरान शगुन देने का रिवाज होता है। यह परंपरा बहुत ही पुरानी है और लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन क्या आपको पता है आखिर क्यों शगुन देने की परंपरा इतने लंबे समय से चली आ रही है। अगर नहीं तो आज इस खबर में बताएंगे कि किसी को विदाई के दौरान शगुन क्यों दिया जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
क्या है शगुन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शगुन देने वाले जातक शगुन के तौर पर शुभकामनाएं देता है। जब किसी व्यक्ति की शादी, जन्मदिन या और कोई शुभ कार्य पर जातक आशीर्वाद के तौर पर उपहार या पैसे देते हैं। यह शगुन के तौर पर माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जीवन के लिए शगुन अच्छा संकेत होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी जातक को शगुन मिलता है, तो ऐसे में बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही जीवन में खुशहाली आती है।
शगुन से होता संबंध मजबूत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति शादी-विवाह या किसी अन्य शुभ अवसर पर शगुन देता है, तो ऐसे में दो परिवारों के बीच रिश्तों में मजबूती आती है। इसके साथ ही आपसी प्रेम और भाई चारे बनी रहती है। मान्यता है कि शगुन देने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही जातक पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
शगुन का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में शगुन का बहुत ही महत्व होता है। हिंदू धर्म में शगुन दो ग्रहों का प्रतीक होता है। ये दो ग्रह बृहस्पति और शुक्र है। मान्यता है कि शगुन इन्ही दोनों ग्रहों का प्रतिनिधित्व करता है। शास्त्र के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य में इन दोनों ग्रहों का आशीर्वाद बहुत ही जरूरी होता है। ऐसी मान्यता है कि गुरु ग्रह को घर की सुख-समृद्धि का कारण माना गया है। कहा जाता है कि शगुन देने से घर में किसी भी प्रकार की कोई समस्याएं नहीं आती है। इसके साथ ही घर हमेशा सुख-शांति से भरा रहता है। वहीं शगुन लेने से जीवन सुखमय होता है क्योंकि शगुन लेने से शुक्र ग्रह प्रसन्न होते हैं।



