आवारा पशुओं को लेकर रांची के इस कपल ने लिया बड़ा फैसला, घर को बना दिया ‘शेल्टर होम’

- आश्रय देने के साथ इलाज की व्यवस्था
- पुत्र शौर्य को भी संगीत के साथ कुत्तों से प्रेम
- 100 कुत्तों को रखने की जगह, आंकड़ा 120 से पार
- सीएसआर से सहयोग का आग्रह, कोई सहायता नहीं मिली
रांची,(झारखंड)। कोलकाता में जन्मे एक दंपती ने झारखंड के रांची जिले में बीमार, छोड़ दिये गए, घायल और अपंग आवारा पशुओं की देखभाल के लिए एक आश्रय स्थल बनाया है। सोमेन मजूमदार और सोनाली मजूमदार रांची शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर अनगड़ा ब्लॉक के टांग-टांग टोली गांव में सार्वजनिक चंदे की मदद से 120 से अधिक आवारा कुत्तों का आश्रय स्थल चलाते हैं। दंपती के आश्रय में लगभग शारीरिक रूप से 50 अक्षम कुत्ते हैं, जिन्हें राजधानी शहर के विभिन्न हिस्सों से लाया गया था। ये कुत्ते या तो वाहनों से कुचले हुए होते हैं या मानवीय क्रूरता के शिकार होते हैं।
दंपती ने न केवल उन्हें आश्रय दिया है बल्कि उपचार भी प्रदान किया है ताकि वे अपने जीने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकें। हालांकि, कुत्तों के लिए उनके प्यार का परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों ने स्वागत नहीं किया। सोनाली ने बताया कि उनके परिवार या रिश्तेदारों में से कोई भी उनसे मिलने नहीं आता क्योंकि वे कुत्तों के साथ रहते हैं, खाते हैं और सोते हैं। शुरुआत में, यह उन्हें चुभता था लेकिन अब उन्हें इसका पछतावा नहीं है। वे अपने बच्चों (कुत्तों) के साथ खुशी से रहते हैं, वे अब उनके परिवार के सदस्य बन गए हैं।
सोनाली बताती है कि उनके इकलौते 21 वर्षीय बेटे शौर्य ने भी संगीत के प्रति अपने जुनून के अलावा अपना जीवन कुत्तों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। वर्ष 2017 में स्थापित आश्रय स्थल में विभिन्न वर्ग के कुत्ते मौजूद हैं। जिसमें विदेशी नस्ल के कुत्तों के लिए रहने की जगह, आक्रामक कुत्तों के लिए पिंजरे, अपंग कुत्तों के लिए अलग जगह और उनके इलाज के लिए क्लीनिक की व्यवस्था है।
आश्रय स्थल में 100 कुत्तों को रखने की जगह है लेकिन यहां कुत्तों की संख्या पहले ही 120 का आंकड़ा पार कर चुकी है। उन्होंने कहा कि जगह की कमी के कारण वे और कुत्तों को नहीं रख सकते। लेकिन अगर लोगों की ओर से कुत्तों को अपनाया जाता है, तो वे यहां सुविधा बढ़ा सकते हैं। क्षमता को 500 जानवरों तक के लिए बढ़ा सकते हैं।
सोमेन ने दावा किया कि उन्होंने अपनी परियोजना के लिए देश की 512 कंपनियों से कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कोष से दान के लिए से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि सभी ने उनके काम की सराहना की लेकिन, उन्हें कोई कोष नहीं मिला। कंपनियों के पास जानवरों के लिए कोई वित्तपोषण योजना नहीं है।




