ग्रामीण डाक सेवा बहाली में फर्जीवाड़ा, फर्जी सर्टिफिकेट के साथ 11 पकड़े

मुजफ्फरपुर,(बिहार)।  प्रधान डाकघर में ग्रामीण डाक सेवक के पद पर बहाली में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। बहाली के लिए पहुंचे 52 अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट सत्यापन के लिए प्रधान डाकघर पहुंचे 11 अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। सभी सार्टिफिकेट झारखंड के बोकारो से होने के कारण शक के आधार पर जब नगर थाना पुलिस ने पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आया। पूछताछ के बाद पुलिस गिरोह के सरगना की तलाश में छपरा में छापेमारी की। यहां से संतोष सिंह को गिरफ्त में लिया गया। जिससे पूछताछ कर आगे की करवाई की जा रही है। इन सभी को अभ्यर्थी के अंक पत्र में अंग्रेजी में 98 नंबर थे। लेकिन इन्हें इंग्लिश लिखने भी नहीं आ रहा था। एक अन्य अभ्यर्थी को 500 में कुल 491 अंक दर्ज हैं।
सत्यापन के दौरान ऑनलाइन इसका वेरीफिकेशन किया गया तो उस रौल नंबर का अंक दिखा ही नहीं। यही नहीं, जिस झारखंड बोर्ड का मैट्रिक सर्टिफिकेट दिया गया। उस वर्ष 2020 में टॉपर को अधिकतम अंक 490 मिले थे। शक होने पर जब सख्ती की गई तो दोने फर्जी सर्टिफिकेट होने की बात कबूल कर ली। रेल डाक सेवा यू डिवीजन के निरीक्षक राजेश कुमार ने फोन पर बताया कि अन्य 9 अभ्यर्थी दस्तावेज के सही होने पर अड़े थे। पूरे मामले की जानकारी देने पर प्रधान डाकघर पहुंची नगर थाना पुलिस ने सभी को हिरासत में लेने के बाद एफआईआर कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

नगर थाना प्रभारी श्रीराम सिंह ने बताया कि पुलिस की पूछताछ में अभ्यर्थियों ने बताया कि तीन लाख में सौदा हुआ था। पुलिस इन सभी के नाम, पते के साथ फर्जी सर्टिफिकेट पर बहाली कराने वाले गिरोह का पता लगाने में जुट गई है। सत्यापन में जुट गई है। रेल डाक सेवा के एक पदाधिकारी ने बताया कि डाक विभाग में जीडीएस पद के लिए भर्ती प्रक्रिया हुई थी। इसमें कई छात्रों का मेरिट लिस्ट निकल चुका था। इसको लेकर सुबह से शाम के छह बजे तक वेरिफिकेशन प्रक्रिया चल रही थी। जिसमें ये फर्जीवाड़ा सामने आया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button