लोन का झांसा देकर चाइनीज ऐप से करते थे ठगी, चीन तक जाता था ठगी के पैसों का हिस्सा

नई दिल्ली। रोहिणी साइबर सेल ने चाइनीज लोन ऐप के जाल में फंसाने वाले चार ठगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान राजस्थान के चित्तौड़गढ़ निवासी मुख्य आरोपी दीपक पटवा, देव किशन, सुरेश सिंह के अलावा नीमच मध्य प्रदेश निवासी सुनील कुमार खटीक के रूप में हुई है। इनसे 15 एटीएम, 7 फोन, 27 सिम, डोंगल, लैपटॉप, टैबलेट, 6 चेकबुक, 5 पासबुक, 20 हजार कैश और एक बीएमडब्ल्यू कार बरामद की है। एक ठग लोन का झांसा देकर पैसा बैंक अकाउंट में डलवाता था। इस रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीन में बैठे मास्टरमाइंड को भेज देता था। बदले में कमीशन मिलता था।

डीसीपी (रोहिणी) प्रणव तायल के मुताबिक, पीड़ित मोहम्मद नदीम सैफी ने बताया कि फोन पर एक मेसेज आया, जिसमें लिखा था कि आपका लोन मंजूर हो गया है। साथ ही मेसेज में दिए गए लिंक पर लॉगइन कर दो लाख तक की लिमिट चुन सकते हैं। ऐसा करने के कुछ देर बाद वॉट्सऐप कॉल आया। कंपनी के नियम के तहत लोन की रकम का पांच फीसदी एडवांस जमा करने को कहा गया, जिसे बाद में लौटाने का वादा किया। पीड़ित ने बताए बैंक खाते में 10 हजार जमा कर दिए। इसके बाद आरोपी ने जवाब देना बंद कर दिया। रोहिणी साइबर सेल ने पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया। जांच में पता चला कि ठगी गई रकम मध्य प्रदेश के नीमच स्थित बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हुई है। इन बैंक खातों को खंगाला तो दो दिन में 75 लाख रुपये से ज्यादा ट्रांसफर होने का खुलासा हुआ। पता चला कि इस रकम से क्रिप्टो करेंसी खरीदी गई। टेक्निकल सर्विलांस से पुलिस ने नीमच से सुनील कुमार खटीक को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मुख्य आरोपी दीपक पटवा के अलावा देव किशन और सुरेश सिंह को भी पकड़ा।

मुख्य आरोपी दीपक ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह इंस्टाग्राम पर कुछ चीनी नागरिकों के संपर्क में आया, जो ऑनलाइन लोन का झांसा देकर ठगी करते थे। दीपक ने यूट्यूब से गुर सीखे और उनके साथ मिलकर ठगी करने लगा। जिनके अकाउंट में पैसा मंगाया जाता था, उन्हें कुल रकम का 1.5 फीसदी देने की बात कह कर अकाउंट ऑपरेट करने की सारी चीजें खुद रख लेता था। रजिस्टर्ड सिम कार्ड भी ले लेता था। आरोपी यूपीआई के जरिए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाता था।

इस रकम से बिनेंस क्रिप्टो एक्सचेंज से यूएसडीटी खरीदकर क्रिप्टो करेंसी में बदलता था। फिर चीन के ठगों को देता था। दीपक को यूएसडीटी में कमीशन मिलता था, जिसे वो अपने खाते में या हवाला के जरिए भुना लेता था। जिस वॉट्सऐप नंबर से ठगी की जाती थी, उसका आईपी एड्रेस चीन का है। चीनी भाषा में मिले मेसेज गूगल ट्रांसलेटर से हिंदी में अनुवाद करता था। गूगल ट्रांसलेटर की मदद से ही अपनी बातों को भेजता था। पुलिस अन्य आरोपियों और पीड़ितों की पहचान कर रही है।

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