रीवा में परमाणु बिजलीघर के विरोध में जल सत्याग्रह, आदिवासी महिला की मौत से गरमाया मामला
रीवा में बन रहे परमाणु बिजली घर का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर वहां पर जल सत्याग्रह चल रहा है। चार दिन से जल सत्याग्रह कर रही एक महिला की मौत हो गई है। हालांकि प्रशासन ने मौत की खबर से इनकार कर दिया है।

रीवा,मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर के विरोध में चल रहे जल सत्याग्रह के बीच आदिवासी महिला विमला कोल की मौत से मामला गरमा गया है। आंदोलनकारियों और महिला के पति का आरोप है कि विमला पिछले चार दिनों से ग्रामीणों के साथ तालाब में उतरकर परियोजना का विरोध कर रही थी। बुधवार रात तबीयत बिगड़ने पर उसे मनगंवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत को लेकर आंदोलनकारी इसे जल सत्याग्रह से जोड़ रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से प्रारंभिक तौर पर मौत बीमारी के कारण होने की बात कही गई है। मामले की वास्तविक वजह स्पष्ट करने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।
प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर को लेकर सरई कला, रोझौही और आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों में लंबे समय से चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से उनकी जमीन, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पिछले करीब एक महीने से ग्रामीणों के साथ सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों से जुड़े लोग भी परियोजना का विरोध कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा की अगुवाई में ग्रामीणों का जल सत्याग्रह भी जारी है।
ग्रामीणों ने परियोजना से जुड़े कार्यों के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। परियोजना का काम शुरू होते ही स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया था। विरोध को देखते हुए फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
महिला की मौत के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। आंदोलनकारी जहां इसे विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौत बता रहे हैं, वहीं प्रशासन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। ऐसे में जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और क्या इसका जल सत्याग्रह से कोई संबंध था।




