लोनी के जावली गांव में जलभराव से त्रस्त ग्रामीण, गंदे पानी में बैठकर अधिवक्ता ने किया प्रदर्शन
गाजियाबाद के लोनी इलाके में पड़ने वाले गांव जावली की गलियां पानी से डूबी हुई हैं। गांव में रहने वाले एडवोकेट महकार कसाना ने गंदे पानी के बीच बैठकर अपना विरोध जताया। गांव वालों ने सड़क नहीं बनने पर चुनाव बहिष्कार तक की चेतावनी दे दी है।

गाजियाबाद। लोनी को लंदन बनाने के दावों के बीच जावली गांव की गलियों में जलभराव की समस्या ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनी हुई है। गंदे पानी से भरी गलियों के कारण लोगों को अपने घरों तक पहुंचने और रोजमर्रा के कामकाज के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने से नाराज गांव निवासी अधिवक्ता महकार कसाना ने गंदे पानी के बीच बैठकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मौके पर पहुंचकर समस्या के समाधान की ठोस पहल नहीं की जाती, उनका विरोध जारी रहेगा।
महकार कसाना का आरोप है कि जावली गांव में जलभराव की समस्या को लेकर पिछले चार वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं। आईजीआरएस पोर्टल, फोन, सामाजिक माध्यमों और संबंधित कार्यालयों के जरिए अधिकारियों तक समस्या पहुंचाई गई, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदले। उन्होंने बताया कि छह दिन पहले लोनी नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी से भी बातचीत हुई थी। उस समय आश्वासन मिला, लेकिन उनके मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
अधिवक्ता महकार कसाना ने आरोप लगाया कि लोनी नगरपालिका और लोनी विधानसभा क्षेत्र के बीच राजनीतिक खींचतान का खामियाजा जावली और निठोरा समेत कई गांवों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि विकास के दावों के बावजूद ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि नगरपालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी, स्थानीय विधायक और संबंधित जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।
ग्रामीणों ने भी स्थानीय विधायक नंदकिशोर गुर्जर और नगरपालिका के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब गांव की गलियों से गंदा पानी निकालने और आवागमन के लिए साफ रास्ता उपलब्ध कराने जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा, तो विकास के बड़े-बड़े दावे सवालों के घेरे में आ जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जलभराव को लेकर पहले भी विधायक, नगरपालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया था। उस समय समस्या के समाधान के लिए चार दिन का समय दिया गया था और जल निकासी की व्यवस्था कराने के साथ मौके का निरीक्षण करने का आश्वासन भी मिला था, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि जिलाधिकारी, नगरपालिका अधिकारियों और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। उनका आरोप है कि वर्ष 2023 में सड़क की पैमाइश कराकर निर्माण कार्य शुरू कराने की बात कही गई थी, परंतु अब तक काम आगे नहीं बढ़ा। ग्रामीणों ने शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कागजों में कार्रवाई होने के बावजूद समस्या का असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर बना हुआ है।
प्रदर्शन कर रहे महकार कसाना और ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि पांच दिन के भीतर जलभराव और सड़क की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो गांववासी चुनाव बहिष्कार का फैसला लेने पर विचार करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि केवल आश्वासन देने के बजाय जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था की जाए और सड़क का निर्माण कराकर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी ग्रामीणों की मांग पर कब तक कार्रवाई करते हैं।




