स्वतंत्रता सेनानी अर्जुन सिंह भदौरिया के परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से कटे, तीन महीने भटकने के बाद प्रशासन ने दिया भरोसा
इटावा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और तीन बार सांसद रहे दिवंगत कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के परिवार के छह सदस्यों के नाम एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। इस परिवार ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की है।

इटावा, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के इटावा में स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व सांसद और लाल सेना के संस्थापक कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि नाम दोबारा जुड़वाने के लिए तीन महीने तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और तहसील निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। मामला सोशल मीडिया पर उठने के बाद सदर एसडीएम ने सभी सदस्यों के नाम मतदाता सूची में अपडेट कराने का भरोसा दिया है।
भदौरिया परिवार के पौत्र राघवेंद्र सिंह के मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी अंतिम सूची में परिवार के छह सदस्यों—रंजना भदौरिया, राहुल भदौरिया, स्मिता भदौरिया, सिद्धार्थ भदौरिया, सुषमा भदौरिया और बोम सिंह के नाम नहीं मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि नाम जुड़वाने के लिए कई बार फोन करने और संबंधित कार्यालयों में संपर्क करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। कभी जरूरी दस्तावेज तो कभी समय की कमी का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता था। परिवार ने नाम हटाए जाने के पीछे साजिश की आशंका भी जताई है।
बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीन्द्र भदौरिया ने जरूरी दस्तावेजों और प्रपत्रों के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर निर्वाचन अधिकारियों से परिवार के सदस्यों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार करीब 150 वर्षों से इटावा में रह रहा है। ऐसे में परिवार के सदस्यों के नाम सूची से हटने के बाद मतदान का अधिकार हासिल करने के लिए परेशान होना दुखद है। उन्होंने नाम हटाए जाने के कारणों पर भी सवाल उठाए।
कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे थे। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने इटावा के चंबल क्षेत्र में सशस्त्र स्वतंत्रता सेनानियों का नेतृत्व किया था। आजादी के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 1957 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 1962 और 1977 में भी सांसद चुने गए। उनकी पत्नी स्वर्गीय सरला भदौरिया भी राज्यसभा की सदस्य रहीं और उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल कल्याण से जुड़े दायित्व निभाए।
मामले में सदर एसडीएम मनोज पाठक ने बताया कि एसआईआर के दौरान परिवार के सदस्यों के फॉर्म जमा नहीं हुए थे। उन्होंने कहा कि परिवार के कुछ सदस्य लंबे समय से दिल्ली में रह रहे हैं और बीएलओ ने घर जाकर संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय परिवार का कोई सदस्य नहीं मिला।
प्रशासन के आश्वासन के बाद परिवार को नाम दोबारा मतदाता सूची में दर्ज होने की उम्मीद है। हालांकि, नाम हटने के कारणों और उन्हें जुड़वाने के लिए किए गए प्रयासों को लेकर परिवार ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि सभी छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में कब तक बहाल हो पाते हैं।




