नोएडा के डीएलएफ मॉल के बाहर पार्किंग माफिया का खेल,पार्किंग के नाम पर 2,000 रुपये मांगने का आरोप
नोएडा के डीएलएफ मॉल के बाहर पार्किंग का खेल चल रहा है। लोगों से कार पार्किंग के नाम पर जबरन पैसे वसूले जा रहे हैं।

नोएडा। सेक्टर-18 स्थित डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया के बाहर कथित अवैध पार्किंग और जबरन वसूली का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्राची मोंगा ने एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया है कि उनकी कार को सड़क किनारे खड़ा करने के बाद टो करके एक बेसमेंट में पहुंचा दिया गया और उसे वापस देने के लिए 2,000 रुपये मांगे गए। वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
प्राची मोंगा के अनुसार, जब वह डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया पहुंचीं, तब मॉल की पार्किंग भरी हुई थी। नोएडा में नई होने के कारण उन्हें आसपास के पार्किंग नियमों और वैकल्पिक स्थानों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि मॉल के बाहर सड़क किनारे कई गाड़ियां खड़ी थीं और उन्हें वहां नो-पार्किंग का कोई स्पष्ट बोर्ड दिखाई नहीं दिया। ऐसे में उन्होंने मौके पर मौजूद एक व्यक्ति से पूछा कि क्या वह अपनी कार वहां खड़ी कर सकती हैं। आरोप है कि उस व्यक्ति ने पहले से कई वाहन खड़े होने का हवाला देते हुए उन्हें भी कार वहीं खड़ी करने की सलाह दी।
प्राची के मुताबिक, वह कार खड़ी कर मॉल के भीतर चली गईं। जब काम पूरा करके लौटीं, तो उनकी कार वहां मौजूद नहीं थी। आसपास खड़े दूसरे वाहन भी हटाए जा चुके थे। शुरुआत में उन्हें लगा कि उनकी कार चोरी हो गई है, जिससे वह घबरा गईं। बाद में एक व्यक्ति ने उन्हें बताया कि कार को टो करके पास के एक बेसमेंट में रखा गया है।
इन्फ्लुएंसर का आरोप है कि जब वह कार लेने के लिए संबंधित स्थान पर पहुंचीं, तो उनसे वाहन छोड़ने के बदले 2,000 रुपये की मांग की गई। इस घटना से नाराज प्राची ने वीडियो जारी कर सवाल उठाया कि यदि यह कार्रवाई यातायात नियमों के तहत की जा रही थी, तो इसकी प्रक्रिया और शुल्क की स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान किए जाने की मांग की।
प्राची मोंगा ने इसे सामान्य यातायात कार्रवाई के बजाय सुनियोजित तरीके से वाहन चालकों को परेशान कर पैसे वसूलने का कथित मामला बताया। उनका दावा है कि लोगों को पहले सड़क किनारे वाहन खड़ा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और बाद में वाहन हटाकर उसे वापस देने के लिए पैसे मांगे जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और यह स्पष्ट नहीं है कि वाहन हटाने में कौन लोग शामिल थे तथा रकम की मांग किस आधार पर की गई।
मामले ने सेक्टर-18 जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में पार्किंग प्रबंधन, वाहन टो करने की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर क्या तथ्य सामने लाते हैं। यदि वाहन हटाने की कार्रवाई नियमों के तहत हुई है, तो संबंधित प्रक्रिया और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है; वहीं, यदि किसी ने पार्किंग के नाम पर अवैध रूप से रकम मांगी है, तो जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।




