दिल्ली चिड़ियाघर में निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में निर्माण सामग्री की आपूर्ति और उपयोग की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने प्रधानमंत्री कार्यालय से स्वतंत्र जांच की मांग की है, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान यानी दिल्ली चिड़ियाघर में निर्माण सामग्री की आपूर्ति, हस्तांतरण और उसके इस्तेमाल की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। विभागीय दस्तावेजों में अलग-अलग तारीखों पर बड़ी मात्रा में ईंट, सीमेंट, रेत और अन्य निर्माण सामग्री चिड़ियाघर के रखरखाव प्रभारी को सौंपे जाने का उल्लेख है। इस मामले में वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने और वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, 18 जून 2025 को हाथियों के बाड़े में सीमेंट-कंक्रीट का फर्श बनाने और अन्य कार्यों के लिए रखरखाव प्रभारी रजनीश पांडेय को 313 घनमीटर बढ़िया मिट्टी, 31.20 घनमीटर महीन रेत और 15.60 घनमीटर मोटी रेत सौंपे जाने का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके बाद 3 नवंबर 2025 के हस्तांतरण रिकॉर्ड में 76.50 घनमीटर गुड अर्थ, 46.81 घनमीटर मोटी रेत, सीमेंट की 1,048 बोरियां और 24 हजार ईंटें दर्ज होने की बात कही गई है। रिकॉर्ड में ट्रैक्टर-ट्रॉली और बेलदारों की सेवाएं उपलब्ध कराने का उल्लेख भी है।
इसी क्रम में 19 जनवरी 2026 के रिकॉर्ड में सीमेंट की 60 बोरियां, 18.08 घनमीटर मोटी रेत और 46 दिन के बेलदारों की सेवाएं सौंपे जाने की जानकारी दर्ज है। इन दस्तावेजों के आधार पर शिकायतकर्ता ने सामग्री के हस्तांतरण के साथ-साथ उसके भंडारण, वास्तविक खपत और इस्तेमाल की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
अजय दुबे का आरोप है कि सामग्री की प्राप्ति, भंडारण और खपत के सत्यापन से संबंधित स्टॉक रजिस्टर, सामग्री निर्गम रजिस्टर, माप पुस्तिका और उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि जब निर्माण एवं मरम्मत कार्यों के लिए सिविल कंस्ट्रक्शन यूनिट मौजूद है, तो रखरखाव अनुभाग को सामग्री सौंपने और उसके उपयोग का हिसाब किस प्रक्रिया के तहत रखा गया।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि कुछ कार्यों में एक ही काम पर दोहरे खर्च की स्थिति बनी हो सकती है। उनका आरोप है कि बची हुई निर्माण सामग्री निजी ठेकेदारों को कम दर पर लौटाई गई और कुछ सामग्री का इस्तेमाल चिड़ियाघर निदेशक के सरकारी आवास पर भी कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती और केवल सामग्री हस्तांतरण के रिकॉर्ड से वित्तीय अनियमितता साबित नहीं होती।
अजय दुबे ने मांग की है कि सामग्री की खरीद और स्वीकृति से संबंधित फाइलों, हस्तांतरण रिकॉर्ड, भुगतान दस्तावेजों तथा संबंधित निर्माण स्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। उनका कहना है कि रिकॉर्ड और मौके पर हुए कार्यों का मिलान करने से सामग्री की वास्तविक खपत, खर्च और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वहीं, चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार ने कहा कि रखरखाव अनुभाग चिड़ियाघर में जरूरत के आधार पर आपातकालीन कार्य और मरम्मत करता है। उनके अनुसार, इस्तेमाल की जाने वाली सभी सामग्रियों का विवरण संबंधित स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और उनके उपयोग का ब्योरा संबंधित अनुभाग प्रभारी द्वारा रखा जाता है।
मामले में अब शिकायतकर्ता की ओर से उठाए गए सवालों और चिड़ियाघर प्रशासन के जवाब के बीच सामग्री हस्तांतरण, उसके उपयोग तथा संबंधित अभिलेखों के सत्यापन को लेकर जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। स्वतंत्र जांच और दस्तावेजों के मिलान के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामग्री का इस्तेमाल निर्धारित कार्यों में किस प्रकार हुआ और रिकॉर्ड संबंधी किसी कमी या अनियमितता की स्थिति है या नहीं।




