कटड़ा में वैष्णो देवी धाम के अलावा है प्राचीन भूमिका मंदिर, माता ने श्रीधर को कन्या के रूप में यहीं दिए थे दर्शन ,नवरात्र में उमड़ रहे श्रद्धालु
कटड़ा स्थित प्राचीन भूमिका मंदिर मां वैष्णो देवी यात्रा का प्रथम पड़ाव है, जहां 700 वर्ष पूर्व मां ने बाबा श्रीधर को कन्या रूप में दर्शन दिए थे।

कटड़ा,जम्मू। माता वैष्णो देवी की पवित्र यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं के लिए कटड़ा स्थित प्राचीन भूमिका मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि करीब 700 वर्ष पूर्व इसी स्थान पर मां वैष्णो देवी ने अपने परम भक्त बाबा श्रीधर को कन्या रूप में दर्शन दिए थे। शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। भक्त यहां पूजा-अर्चना और कन्या पूजन कर मां वैष्णो देवी के भवन की यात्रा आरंभ कर रहे हैं।
भूमिका मंदिर का संबंध मां वैष्णो देवी और उनके अनन्य भक्त बाबा श्रीधर की प्राचीन कथा से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा श्रीधर ने मां की आज्ञा से एक विशाल भंडारे का आयोजन किया था। इस दौरान कन्या पूजन भी किया जा रहा था। मान्यता है कि इसी भंडारे में मां वैष्णो देवी ने बाबा श्रीधर को कन्या के रूप में दर्शन दिए थे। भंडारे में शामिल भैरवनाथ भी मां के पीछे-पीछे इसी स्थान से त्रिकूट पर्वत की ओर चले गए थे। आगे चलकर मां वैष्णो देवी त्रिकूट पर्वत की पवित्र गुफा में तीन पवित्र पिंडियों के रूप में विराजमान हुईं।
मंदिर के गर्भगृह में मां वैष्णो देवी की मूर्तियां स्थापित हैं, जिन्हें धार्मिक परंपरा के अनुसार बाबा श्रीधर द्वारा स्थापित माना जाता है। श्रद्धालुओं की इस प्राचीन स्थल के प्रति गहरी आस्था है। भक्त यहां मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा-अर्चना और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं पर मां की विशेष कृपा बनी रहती है।
नवरात्र के अवसर पर भूमिका मंदिर में सुबह-शाम पूजा-अर्चना के साथ हवन-यज्ञ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। श्रद्धालु मां वैष्णो देवी से अपने परिवार के कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश में शांति और खुशहाली की कामना भी की जा रही है।
प्राचीन भूमिका मंदिर आधार शिविर कटड़ा से करीब 700 मीटर की दूरी पर कटड़ा-उधमपुर मार्ग पर स्थित है। प्राकृतिक जलधाराओं, बावलियों और घने जंगलों से घिरा यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। यहां श्रद्धालु पैदल अथवा वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं। अनेक भक्त मां वैष्णो देवी के भवन की यात्रा शुरू करने से पहले इस मंदिर में माथा टेकना और कन्या पूजन करना अपनी धार्मिक परंपरा का हिस्सा मानते हैं।
मंदिर के पुजारी शुभम शर्मा ने बताया कि वह मां वैष्णो देवी के परम भक्त बाबा श्रीधर के वंशज हैं और मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना तथा हवन-यज्ञ कराते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में मां के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। पुजारी के अनुसार, यात्रा आरंभ करने से पहले इस पवित्र स्थल पर कन्या पूजन करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के प्रति अटूट विश्वास के साथ यहां से अपनी पवित्र यात्रा आगे बढ़ाते हैं।





