केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंत्री पद के साथ राज्यसभा से भी दिया इस्तीफा

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने अपने मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से मुक्त किए जाने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं साझा कीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुरुगन ने अपने पत्र में तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संगठन के लिए काम करने की इच्छा व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुरुगन ने केंद्र सरकार में काम करने के अपने अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे मंत्रालयों से जुड़ी जिम्मेदारियों ने उन्हें देश और आम लोगों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर दिया। उन्होंने इन जिम्मेदारियों को अपने लिए सम्मान और सीख का महत्वपूर्ण अनुभव बताया।
मुरुगन ने अपने पारिवारिक जीवन और शुरुआती संघर्षों का जिक्र करते हुए लिखा कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते हैं। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी और पशुपालन से जुड़े रहे हैं तथा तमिलनाडु के कोनूर गांव में सादा जीवन बिताते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनका बेटा एक दिन केंद्र सरकार में जिम्मेदारी निभाएगा।
तमिलनाडु की हालिया यात्रा का उल्लेख करते हुए मुरुगन ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि यात्रा के दौरान लोगों का उत्साह और प्रधानमंत्री के प्रति उनका स्नेह देखकर उन्हें गर्व महसूस हुआ। उनके अनुसार, इस अनुभव ने तमिलनाडु, पार्टी और देश के लिए और अधिक काम करने के उनके संकल्प को मजबूत किया।
मुरुगन ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए बताया कि महाकवि सुब्रमण्यम भारती, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने कॉलेज के दिनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर काम शुरू किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद और भाजपा में लगभग तीन दशकों के दौरान उनका मूल मंत्र राष्ट्र को सर्वोपरि रखना रहा है।
पत्र में मुरुगन ने यह भी कहा कि भाजपा में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर देने की परंपरा ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का मौका दिया। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में काम करने से लेकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने तक के सफर को उन्होंने प्रधानमंत्री और पार्टी के विश्वास का परिणाम बताया।
मुरुगन ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा करने को अपने जीवन का बड़ा सम्मान बताया। उनके इस्तीफे से जुड़ी आगे की प्रक्रिया और औपचारिक स्वीकृति के संबंध में स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही उनके पदों से मुक्त होने की अंतिम स्थिति सामने आएगी।

 

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