गर्म पत्थर से कर रहा था बवासीर की सिकाई, शरीर के अंदर चला गया डेढ़ किलो का पत्थर
कानपुर में डॉक्टरों ने 45 साल के एक व्यक्ति के रेक्टम से 1.5 किलो वजन का एक पत्थर निकाला है। मरीज झोलाछाप डॉक्टर की सलाह पर सिकाई के लिए पत्थर का इस्तेमाल करता था। लेकिन शनिवार को पत्थर गलती से उसके अंदर चला गया।

कानपुर,उत्तर प्रदेश। शहर के सरकारी उर्सला अस्पताल में एक असामान्य चिकित्सकीय मामला सामने आया है। यहां चिकित्सकों ने 45 वर्षीय एक व्यक्ति के मलाशय से करीब डेढ़ किलोग्राम वजन का पत्थर सफलतापूर्वक बाहर निकाला। चिकित्सकों के अनुसार, यह पत्थर करीब 48 घंटे से मरीज के मलाशय में फंसा हुआ था। मरीज ने शुरुआत में डॉक्टरों को केवल बवासीर की समस्या के बारे में बताया था, लेकिन जांच के दौरान वास्तविक स्थिति सामने आई।
जानकारी के अनुसार, सरसैया घाट निवासी व्यक्ति बवासीर की समस्या से परेशान था। बताया गया कि वह एक स्थानीय चिकित्सक की सलाह पर गर्म सिकाई के लिए गोल पत्थर का इस्तेमाल करता था। शनिवार को सिकाई के दौरान पत्थर अचानक मलाशय में चला गया। इसके बाद उसे तेज दर्द होने लगा और बैठने तथा चलने में परेशानी होने लगी।
मरीज ने शुरुआत में घटना के बारे में बताने में झिझक दिखाई और चिकित्सकों को बवासीर से जुड़े लक्षण ही बताए। करीब दो दिन तक परेशानी सहने के बाद वह सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा के बाह्य रोगी विभाग में पहुंचा। चिकित्सकों ने जब बीमारी और दर्द के कारणों के बारे में विस्तार से पूछताछ की तो उन्हें स्थिति असामान्य लगी। इसके बाद मरीज का एक्स-रे कराया गया।
जांच में मलाशय के निचले हिस्से में एक बड़ी बाहरी वस्तु फंसी दिखाई दी। इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाते हुए शल्य उपकरणों की मदद से पत्थर को बाहर निकाला। चिकित्सकों के अनुसार, पत्थर को बिना तोड़े सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया।
डॉ. प्रशांत मिश्रा ने बताया कि समय रहते उपचार नहीं मिलने पर यह वस्तु आंतों की ओर और अंदर जा सकती थी। ऐसी स्थिति में इसे निकालने के लिए पेट की शल्यक्रिया करनी पड़ सकती थी और जटिलताएं बढ़ सकती थीं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, प्रक्रिया के बाद मरीज को वार्ड में भर्ती कर निगरानी में रखा गया और उसकी हालत में सुधार बताया गया है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि शरीर से जुड़ी किसी भी असामान्य समस्या या चोट को छिपाने के बजाय समय रहते चिकित्सक को पूरी जानकारी दें। सही और पूरी जानकारी मिलने से चिकित्सकों को बीमारी का कारण समझने और समय पर उचित उपचार करने में मदद मिलती है।




