मर्सिडीज और पांच सितारा होटल में 100 दिन का ठहराव, मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी की जीवनशैली पर बॉम्बे हाईकोर्ट हैरान
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को पूर्व असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (एपीआई) सचिन वझे की आलीशान जीवन शैली पर हैरानी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि एपीआई रहते मर्सिडीज जैसी महंगी कार से घूमना और करीब 100 दिनों तक पांच सितारा होटल (ओबेरॉय) में ठहरना कैसे संभव हुआ?

मुंबई,एजेंसी। उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी गाड़ी मिलने और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में आरोपी पूर्व सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वझे की कथित जीवनशैली को लेकर बंबई हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जमानत के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने वझे द्वारा महंगी कारों के इस्तेमाल और दक्षिण मुंबई के एक आलीशान होटल में करीब 100 दिन ठहरने से जुड़े पहलुओं पर सवाल किया।
अदालत ने पूछा कि सहायक पुलिस निरीक्षक पद पर रहते हुए वझे के लिए मर्सिडीज जैसी महंगी कार का इस्तेमाल करना और लंबे समय तक आलीशान होटल में ठहरना किस तरह संभव था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान का हवाला देते हुए बताया कि वझे मर्सिडीज और अन्य महंगी गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे। एजेंसी के अनुसार उस समय सहायक पुलिस निरीक्षक का मासिक वेतन करीब 90 हजार रुपये था।
पीठ ने यह भी पूछा कि वझे मर्सिडीज से पुलिस आयुक्त कार्यालय और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा तक कैसे जाते थे। अदालत ने उनकी होटल में करीब 100 दिन की बुकिंग को लेकर भी सवाल किया। सुनवाई के दौरान पीठ ने संकेत दिया कि वझे की आर्थिक स्थिति, आचरण और सेवा संबंधी पहलुओं को मामले में लगाए गए कथित वसूली के आरोपों के संदर्भ में देखा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान एंटीलिया के बाहर मिली विस्फोटक सामग्री को लेकर भी अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी से सवाल किए। पीठ ने पूछा कि गाड़ी में मिली जिलेटिन की छड़ों की खरीद के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच एजेंसी के पास क्या सामग्री है। एजेंसी की ओर से बताया गया कि उसे छड़ों के स्रोत की जानकारी नहीं है और जांच के दौरान वझे ने सहयोग नहीं किया।
वझे की जमानत का विरोध करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि यदि उन्हें रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर सकते हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई तत्काल शुरू करने के लिए वह तैयार है और करीब 150 गवाहों से पूछताछ की जानी है। दूसरी ओर, अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि पांच साल से अधिक समय से हिरासत में रह चुके वझे को कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिलने से क्या नुकसान होगा।
वझे को निचली अदालत से मिली जमानत के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। हाईकोर्ट ने फिलहाल जमानत पर लगी अंतरिम रोक को 14 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। वझे इस मामले में ठाणे केंद्रीय जेल में बंद हैं।




