गाजियाबाद में 29 साल बाद भी गिरफ्त से दूर पूर्व आईपीएस ज्योति बेलूर

फर्जी भोजपुर एनकाउंटर केस अधर में

गाजियाबाद। करीब तीन दशक बीत चुके हैं, लेकिन 1996 के चर्चित भोजपुर फर्जी एनकाउंटर केस की आरोपी पूर्व आईपीएस ज्योति बेलूर अब भी सीबीआई की पकड़ से दूर हैं। गिरफ्तारी न होने से मामला अब तक अधर में लटका हुआ है और सीबीआई कोर्ट को सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए उनका इंतजार करना पड़ रहा है।
8 नवंबर 1996 को थाना भोजपुर क्षेत्र के मछरिया गांव की पुलिया पर पुलिस ने एक एनकाउंटर में चार युवकों को मार गिराया था। अगले दिन मृतकों की पहचान मोदीनगर निवासी प्रवेश, जसवीर, जलालुद्दीन और अशोक के रूप में हुई थी। घटना के बाद ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर सीबीआई जांच की मांग की।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामला सीबीआई को सौंपा। जांच में सीबीआई ने एनकाउंटर को फर्जी मानते हुए तत्कालीन एसओ समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। पीड़ित पक्ष के बयान के आधार पर कोर्ट ने तत्कालीन एएसपी ज्योति बेलूर को भी आरोपी बनाया। आरोप है कि उनके सरकारी रिवॉल्वर से भी फायरिंग हुई थी।
मामला दर्ज होने के बाद ज्योति बेलूर इंग्लैंड चली गई और कभी भी कोर्ट में पेश नहीं हुई। कोर्ट ने कई बार गैर-जमानती वारंट और कुर्की आदेश जारी किया, लेकिन अब तक न तो गिरफ्तारी हो पाई है और न ही कुर्की की कार्रवाई पूरी हो सकी। तीन दशक बीतने के बाद भी ज्योति बेलूर की गिरफ्तारी न होना सीबीआई और न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है।
फर्जी एनकाउंटर के आरोपों और बेलूर की फरारी के कारण सीबीआई कोर्ट को सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए आरोपी की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। यह मामला उन चर्चित फर्जी एनकाउंटर मामलों में शामिल है, जिसने पूरे प्रदेश में पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

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