तेंदुए से लड़ने वाले हिमाचल के प्रवेश शर्मा को पहले दिया इनाम, अब वन विभाग ने दर्ज किया जानवर को मारने का केस

शिमला/एजेंसी। करीब चार दिन पहले सोलन के अरकी तहसील के सरली गांव में 18 साल के प्रवेश शर्मा ने तेंदुए से जंग लड़कर बहादुरी दिखाई थी। प्रवेश ने जानलेवा हमला करने वाले तेंदुए का पत्थर और लाठी से मुकाबला किया था। दोनों के बीच करीब 10-15 मिनट तक संघर्ष हुआ, जिसमें प्रवेश की जीत हुई और तेंदुआ मर गया। जब यह खबर फैली तो दूर-दूर से लोग प्रवेश को देखने आए। अखबारों में उनकी बहादुरी के किस्से छपे और वन विभाग ने भी तारीफ के साथ उसे पांच हजार रुपये का इनाम दिया। इनाम मिलने के 24 घंटे के भीतर ही प्रवेश के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया। अरकी रेंज ऑफिसर अशोक कुमार ने इसकी पुष्टि की है।
अरकी के आईटीआई में सेंकेंड ईयर में पढ़ने वाला प्रवेश शर्मा 9 मार्च की सुबह अपने चाचा के घर से दूध लेने जा रहा था। घर से निकलते ही एक मादा तेंदुए ने झाड़ियों से निकलकर अचानक उस पर हमला कर दिया। मादा तेंदुआ अपने पंजे से प्रवेश के चेहरे पर हमला करती रही। उसने लड़के की गर्दन जबड़े में दबोचने की कोशिश की। करीब 10 मिनट तक जूझने के बाद प्रवेश ने तेंदुए का जबड़ा पकड़ लिया। फिर पत्थर से उस पर लगातार हमले किए। इस दौरान वह मदद की गुहार भी लगाता रहा। करीब पांच मिनट बाद उसके पिता और अन्य लोग बचाने पहुंचे तो देखा कि तेंदुआ मर चुका था। लोग प्रवेश के कारनामे से हैरत में थे। 10 मार्च को जब खबर सुर्खियों में आई तो वन विभाग ने 5000 रुपये का इनाम भी दे दिया।
थाने में प्रवेश और उसके पिता का बयान दर्ज
11 मार्च को प्रवेश शर्मा के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट , 1972 की धारा 51 के तहत केस दर्ज किया गया। पिता बालक राम शर्मा को बताया गया कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के बीट अफसर हीरालाल की शिकायत पर शिकायत दर्ज की गई है। 12 मार्च को प्रवेश और उसके पिता को बयान दर्ज कराने के लिए अरकी पुलिस स्टेशन बुलाया गया। पुलिस स्टेशन में मौजूद वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वह सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं, क्योंकि एक संरक्षित वन्य जीव की हत्या हुई है। अपने बयान में प्रवेश ने बताया कि उसने पहले भागने की कोशिश की थी। जब तेंदुए ने उसे दबोच लिया, तो उसने जानवर को जबड़े से पकड़कर जमीन पर पटका था। फिर उसने आत्मरक्षा के लिए पत्थर और लाठी से उसे पीटा।
बता दें कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 की धारा 11 (2) में ‘आत्मरक्षा’ से जुड़े स्पष्टीकरण हैं। इस नियम के तहत आत्मरक्षा के लिए वन्य जीव को मारना या घायल करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। वन्य जीव पर हमला या उसकी हत्या आत्मरक्षा में की गई है, यह तय करना अदालत का काम है। साक्ष्यों के आधार पर अदालत तय करती है कि वन्य जीव की हत्या गलत इरादे से की गई है या आत्मरक्षा के लिए।



