गिरिडीह का अंसारी परिवार 95 वर्षों से मना रहा छठ महापर्व
नहाय-खाय से खरना तक की परंपरा निभाता है अंसारी परिवार

गिरिडीह/झारखंड। सूर्य की उपासना का महापर्व छठ किसी धर्म की सीमाओं में बंधा नहीं है, यह बात गिरिडीह जिले का अंसारी परिवार पिछले 95 वर्षों से अपनी अटूट श्रद्धा और कर्म से साबित कर रहा है। गिरिडीह जिले की सिंदवरिया पंचायत के हरकट्टो टोला में रहने वाला यह मुस्लिम परिवार बीते लगभग एक शताब्दी से छठ मना रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनूठी मिसाल कायम की है।
परिवार के मुखिया अख्तर अंसारी और उनकी पत्नी शकीला खातून आज भी इस पर्व को उसी आस्था और कड़े नियम के साथ मनाते हैं, जैसी शुरुआत साल 1930 में उनके दादा बुधन मियां ने की थी।
अख्तर अंसारी ने बताया कि उनके दादा बुधन मियां और गांव के उनके दोस्त बुधन महतो एक ही समय के थे। 1930 में जब बुधन मियां ने बुधन महतो के घर छठ पूजा होते देखी, तो वह बहुत प्रभावित हुए। उस समय उनका परिवार आर्थिक कठिनाइयों और बीमारियों से जूझ रहा था। इन परेशानियों को देखते हुए बुधन मियां ने अपने घर में भी छठ करने की ठानी और पूरे नियमपूर्वक छठ किया। इसके बाद से यह परंपरा आज भी उनके घर में कायम है।
अंसारी परिवार हर वर्ष नहाय-खाय और खरना से पूजा की शुरुआत करता है, और फिर अस्ताचलगामी (डूबते) व उदयीमान (उगते) सूर्य को अर्घ्य अर्पित करता है। अख्तर अंसारी ने बताया कि इस अनुष्ठान में परिवार के सभी सदस्य एकजुट होकर भागीदारी निभाते हैं, जिससे घर में हमेशा शांति और समृद्धि बनी रहती है।
2025 के इस छठ पर्व पर भी परिवार ने नियम के अनुसार छठ के पहले दिन नहाय-खाय से शुरुआत की। इसके बाद दूसरे दिन खरना (लोहंडा) के दिन अंसारी परिवार ने परंपरा के अनुसार गुड़ की खीर बनाकर प्रसाद तैयार किया और पूरे परिवार ने श्रद्धापूर्वक उसका सेवन किया। परिवार आज (सोमवार) भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य और मंगलवार को दूसरा अर्घ्य अर्पित करेगा, जिससे 95 वर्षों से चली आ रही यह आस्था और परंपरा आगे बढ़ेगी।
पंचायत के मुखिया रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि जब अंसारी परिवार बाघमारा तालाब छठ घाट पर पहुंचता है, तब हिन्दू-मुस्लिम की दीवारें मिट जाती हैं। उन्होंने कहा कि यहां हर साल सामाजिक समरसता और भाईचारे का जश्न देखने को मिलता है। अंसारी परिवार की यह परंपरा न केवल सांस्कृतिक विरासत को मजबूत कर रही है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और एकता का संदेश भी देती है।




