धान खरीदी केंद्र कोडा में अव्यवस्था का अंबार,जानवर खा रहे धान
जिम्मेदार बोले—“मैं भगवान नहीं हूं, जहां शिकायत करनी है कर लो!”

शोभित शर्मा,खड़गवा/छत्तीसगढ़। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कोडा के धान खरीदी केंद्र में भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। हालात इतने खराब हैं कि खरीदा गया धान खुले में पड़ा है और जानवर उसे खा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी कोई चिंता नहीं है।
प्राकृतिक आपदा का बहाना या लापरवाही?
समिति के धान खरीदी केंद्र में रखे धान को जानवरों के द्वारा खाया जा रहा था इस संबंध में समिति मैनेजर से रखे धान की व्यवस्था के संबंध में पूछे जाने पर उनका कहना है कि “मैं भगवान थोड़ी हूं कि हाथ हिलाऊं और तिरपाल ढक जाए और धान को घेरा गया था जाली से वो ठीक हो जाए, मैं क्या कर सकता हूं आधी तूफान में गिर गया है तिरपाल उड़ गया है। जहां शिकायत करना है कर दो।”
इस तरह का बयान समिति के मैनेजर के द्वारा दिया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं और किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
किसानों की मेहनत बर्बाद
किसानों का आरोप है कि:धान को सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं, न तिरपाल, न बाउंड्री, न निगरानी।
समिति ने पदस्थ कंप्यूटर आपरेटर के द्वारा कान में हेडफोन लगाकर मोबाइल में बात करने में मस्त है। और किसान घंटों उसकी बात खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। इस व्यवस्था से आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कोडा का संचालन किया जा रहा है समिति मैनेजर भी कार्यालय से नदारत रहते हैं। खुले में पड़ा धान जानवरों और मौसम की मार झेल रहा है।
सबसे बड़ा सवाल
जब धान खरीदी हो रही थी, तब भंडारण की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? समिति मैनेजर की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
जिम्मेदार कौन?
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि: क्या प्रशासन इस लापरवाही पर कार्रवाई करेगा? या फिर किसानों की मेहनत यूं ही बर्बाद होती रहेगी?
जनता की मांग
तुरंत जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो। शासन के नुकसान की भरपाई की जाए। खरीदी केंद्र में पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।




