कानपुर लेम्बोर्गिनी केस: 8.30 करोड़ की जमानत राशि पर छूटेगी लग्जरी कार, कोर्ट का बड़ा आदेश

कानपुर/उत्तर प्रदेश। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज मिश्रा की कोर्ट ने मार्ग दुर्घटना के बाद से ग्वालटोली थाने में खड़ी करोड़ों की लैंबोर्गिनी कार को रिलीज (अवमुक्त) करने के आदेश दिए हैं। कार के लिए 8.30 करोड़ रुपये की एक जमानत और अंडरटेकिंग देनी होगी। सात फरवरी को आर्य नगर निवासी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा अपने चालक मोहन एम के साथ लैंबाेर्गिनी कार से जा रहा था। तभी भैरोघाट चौराहे पर दुर्घटना में चमनगंज घोसियाना निवासी तौफीक अहमद को टक्कर लग गई थी। इससे वह घायल हो गया था। इसके बाद चालक मोहन एम ने कोर्ट में सरेंडर किया था। पुलिस ने रिपोर्ट दी थी कि चालक इस मामले में आरोपित नहीं है। बाद में विवेचना में सहयोग न करने और नोटिस न लेने पर पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने गिरफ्तारी गलत बताते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में नहीं लिया था।
20 हजार के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया था। शिवम मिश्रा की तरफ से कार रिलीज करने के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था। मुकदमे में पैरवी के लिए शिवम की ओर से एक अटार्नी सुनील कुमार के नाम पर बना दी गई थी। कोर्ट ने तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट और पुलिस रिपोर्ट मंगाई थी। दोनों रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट ने रिलीज प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। अधिवक्ता शिवाकांत ने बताया कि ऐसे मामलों में वाहन को अवमुक्त करने की एवज अदालत जमानत राशि तय करता है। जमानत राशि कितनी होगी यह न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है। हालांकि अमूमन वाहन की कीमत के बराबर जमानत राशि का निर्धारण किया जाता है।

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