‘हिरासत में लिए जाएंगे हजारों शरणार्थी’ ग्रीन कार्ड पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला

लगभग दो लाख शरणार्थी इस नए नियम से प्रभावित होंगे

वाशिंगटन/एजेंसी। डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन के एक नए आदेश ने वैध रूप से अमेरिका में रह रहे हजारों शरणार्थियों के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है। ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले शरणार्थियों को अब अमेरिका में प्रवेश के एक वर्ष बाद अपनी अर्जी की समीक्षा के दौरान संघीय हिरासत में लौटने की शर्त का सामना करना पड़ सकता है।
इस प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक स्तर पर विरोध तेज हो गया है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) द्वारा संघीय अदालत में मिनेसोटा से जुड़े मामले की सुनवाई से पहले जारी एक मेमो में कहा गया है कि स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) के लिए आवेदन करने वाले शरणार्थियों को निरीक्षण और सुरक्षा समीक्षा के दौरान हिरासत में रखा जा सकता है।
हालांकि मेमो में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इससे कितने लोगों को प्रभावित किया जाएगा या हिरासत की अवधि कितनी होगी। पहले से ही सख्त हैं प्रवेश के नियम कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक की प्रथा के अनुसार, शरणार्थियों को अमेरिका में प्रवेश से पहले बहुस्तरीय सुरक्षा जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और पृष्ठभूमि परीक्षण से गुजरना पड़ता है।
अमेरिका के शरणार्थी अधिनियम 1980 के तहत उन्हें एक वर्ष बाद स्थायी निवास के लिए आवेदन का अधिकार मिलता है और आमतौर पर इस प्रक्रिया के दौरान हिरासत का प्रविधान नहीं रहा है। ऐसे में नया निर्देश स्थापित नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
दो लाख शरणार्थी होंगे प्रभावित अधिकार कार्यकर्ताओं और पुनर्वास संगठनों ने इस कदम को ‘अनावश्यक और दंडात्मक’ बताते हुए कहा है कि इससे परिवारों में भय और भ्रम का माहौल बनेगा। उनका तर्क है कि बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिका आए लगभग दो लाख शरणार्थी इस फैसले से सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन ने नीतिगत बदलावों के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक दबावों का हवाला दिया है। इससे पहले भी प्रशासन शरणार्थियों की संख्या में कटौती, शरण प्रक्रिया को कड़ा करने और पुराने मामलों की पुनर्समीक्षा की घोषणा कर चुका है। पिछले वर्ष के अंत में जारी एक अन्य मेमो में बाइडेन काल में आए शरणार्थियों की व्यापक समीक्षा तथा ग्रीन कार्ड स्वीकृतियों पर अस्थायी रोक की बात कही गई थी।
मिनेसोटा की संघीय अदालत में सुनवाई के दौरान जस्टिस डिपार्टमेंट के अटार्नी ब्रैंटले मेयर्स ने दलील दी कि सरकार के पास यह अधिकार होना चाहिए कि वह प्रवेश के एक वर्ष बाद भी शरणार्थियों को हिरासत में लेकर उनकी पात्रता की जांच कर सके। मामले की सुनवाई कर रही जज टनहेम ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन अस्थायी राहत को बरकरार रखा है, जिससे तत्काल व्यापक हिरासत की संभावना टल गई है। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक सीनेटर टीना स्मिथ ने कहा कि प्रशासन का कदम मानवीय मूल्यों के खिलाफ है और वे अदालत में इस नीति को चुनौती देने का समर्थन जारी रखेंगी।

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