चंद्रबाबू नायडू की हाउस अरेस्ट याचिका को कोर्ट ने किया खारिज, करोड़ों के भ्रष्टाचार का है आरोप

आंध्र प्रदेश/एजेंसी। एक अदालत ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू द्वारा हाउस रिमांड हासिल करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। चंद्रबाबू नायडू को पिछले हफ्ते कथित करोड़ों रुपये के घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। विजयवाड़ा में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कोर्ट ने मंगलवार को मामले में सीआईडी ​​की दलील से सहमति जताई और चंद्रबाबू नायडू को हाउस रिमांड से इनकार कर दिया। तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। आंध्र प्रदेश सीआईडी ​​प्रमुख एन संजय ने कहा कि उन्हें कौशल विकास निगम से धन के दुरुपयोग से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिससे राज्य सरकार को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
नायडू का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा के नेतृत्व में वकीलों की एक टीम ने खतरे की आशंका का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री को घर में हिरासत में रखने के लिए सोमवार को एक याचिका दायर की थी। रविवार को विजयवाड़ा की एक स्थानीय अदालत ने चंद्रबाबू नायडू को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पूर्व मुख्यमंत्री पूर्वी गोदावरी जिले के राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में बंद हैं। एसीबी कोर्ट ने राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल के अधीक्षक को 73 वर्षीय नायडू के जीवन को कथित खतरे के मद्देनजर अलग से रखने का निर्देश दिया। पूर्व सीएम को जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है।
लूथरा ने यह भी तर्क दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री को मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। इस बीच, वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और आंध्र प्रदेश सरकार के सलाहकार सज्जला रामकृष्ण रेड्डी ने नायडू पर निशाना साधते हुए कहा कि वह और विपक्षी दल ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे उनके साथ कुछ अनहोनी हो गई हो। रेड्डी ने नायडू को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘अपराध के लिए अपना सिर शर्म से झुकाने के बजाय, वे (नायडू और तेदेपा नेता) राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।’’ अदालत को सौंपी गई रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, सीआईडी ने कहा कि पूछताछ के दौरान नायडू सहयोग नहीं कर रहे थे।

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