दिल्ली में बीएस-4 माल वाहक वाहनों पर रोक से 18 लाख गाड़ियां होंगी प्रभावित, प्रतिबंध पर ट्रांसपोर्टर नाराज
Ban on BS-4 goods carrying vehicles in Delhi will affect 18 lakh vehicles, transporters angry over the ban

दिल्ली ब्यूरो। राजधानी में इस साल एक नवंबर से बीएस-4 और उससे नीचे के माल वाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध के खिलाफ देशभर के ट्रांसपोर्टरों में भारी नाराजगी है। रविवार को ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) की बैठक आयोजित की गई। इसमें देश भर के 600 से अधिक सदस्य और 65 से ज्यादा संगठन जुड़े। बैठक में ट्रांसपोर्ट संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया तो अगस्त से दिल्ली एनसीआर में चक्का जाम कर दिया जाएगा।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इस प्रतिबंध से करीब 18 लाख माल वाहक वाहनों पर असर पड़ेगा। इनमें वे गाड़ियां शामिल हैं जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से रोजाना खाद्यान्न, दवाइयां, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं लाती हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इससे दिल्ली की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी।
बैठक के दौरान एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. हरीश सभरवाल ने कहा, अगर सरकार ने इन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन तेज किया जाएगा और संपूर्ण ट्रांसपाेर्ट समुदाय स्वेच्छा से अपना काम बंद कर देगा। ट्रांसपोर्टरों ने कहा, ट्रांसपोर्टर अपनी गाड़ियों का नियमित प्रदूषण जांच कराते हैं और प्रदूषण सर्टिफिकेट लेकर चलते हैं।
ऐसे में बीएस-4 गाड़ियों पर रोक लगाना अनुचित है। उन्होंने कहा, सरकार को चाहिए कि वह हमें सब्सिडी दे ताकि हम बीएस-4 इंजन बदलकर बीएस-6 करें और प्रदूषण मानकों को पूरा कर सकें, लेकिन सरकार बिना चर्चा के प्रतिबंध लगाने पर आमादा है। ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के अध्यक्ष भीम वाधवा ने कहा, दिल्ली और एनसीआर की 70 से ज्यादा संस्थाएं साथ हैं। सरकार के आदेश से सिर्फ दिल्ली के ट्रांसपोर्टर नहीं, बल्कि देशभर के ट्रांसपोर्टर प्रभावित होंगे।
कोई पैरामीटर तय नहीं किया गया है। 2020 में बीएस-4 गाड़ियां बेची गईं, उनकी उम्र 2030 तक है। अब उसे 2025 में खत्म करने का फरमान लागू कर दिया गया। सोचिए, जिसकी गाड़ी की किस्तें ही बाकी हैं, वो कैसे अपनी आजीविका चला पाएगा। एआईएमटीसी के पूर्व अध्यक्ष गुरिंदर पाल सिंह राजू ने कहा, सरकार का यह फैसला रोजगार संकट खड़ा करेगा और ट्रांसपोर्ट कारोबार में भारी आर्थिक नुकसान देगा।




