मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 5100 दीपों से जगमगाता नजर आएगा विश्राम घाट, महाकुंभ जैसी होगी सुरक्षा व्यवस्था
श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारिकाधीश और वृंदावन में रहेगी पैनी नजर

मथुरा/उत्तर प्रदेश। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा की नगरी द्वापर युग जैसी सजेगी। कलाकार जगह-जगह कन्हैया के स्वरूप में लीलाओं का मंचन करेंगे। रंगी-बिरंगी लाइटें द्वापर युग की आभा बिखेरेंगी। वहीं 20 स्थानों पर छोटे आयोजन होंगे। 238 कलाकार विभिन्न स्थानों पर रंगमंच का आयोजन करेंगे और विश्राम घाट पर 5100 दीप जलाए जाएंगे। वहीं 25 ग्रुप के 325 कलाकार श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शोभायात्रा निकालेंगे। यह शोभायात्रा छह प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी।
शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने अधिकारियों के साथ बैठककर तैयारियों का खाका खींचा है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सभागार में आयोजित बैठक में कैबिनेट मंत्री ने मंदिरों के आसपास विशेष सफाई अभियान चलाने, विभिन्न आयोजनों के आसपास अस्थायी टॉयलेट लगाने, प्रमुख मार्गों पर विद्युत सजावट व स्वागत द्वार बनाने को कहा है। साथ ही निर्बाध विद्युत आपूर्ति, पोल की प्लास्टिक रैपिंग, ट्रांसफाॅर्मर की बैरिकेडिंग, लटके तारों को ठीक के भी निर्देश दिए हैं। आयोजन स्थलों व अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर एंबुलेंस व स्वास्थ्य टीम भी मौजूद रहेगी।
जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने एमवीडीए एवं नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में भगवान श्रीकृष्णजी पर आधारित वॉल पेंटिंग की जाएं। दीवारों को इस प्रकार सजाया जाए कि आने वाले श्रद्धालु, दर्शनार्थी कान्हा की नगरी से एक अलग अनुभव लेकर जाएं। एलईडी स्क्रीन, होर्डिंग, स्टैंडी पर भी कान्हा की बाल लीलाओं को दर्शाया जाएगा। इसके अलावा पुलिस के भी कड़े बंदोबस्त रहेंगे। महाकुंभ जैसी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था होगी। चप्पे-चप्पे पर ड्रोन कैमरे और पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे।
बैठक में यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्र, महापौर विनोद अग्रवाल, विधायक पूरन प्रकाश, एमएलसी ओम प्रकाश सिंह, सांसद प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ श्याम बहादुर सिंह, उप जिलाधिकारी सदर अभिनव जे जैन, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन अजय कुमार, सीएमओ संजीव यादव, अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सहित विभिन्न मंदिरों के प्रबंधक तथा अधिकारी मौजूद रहे।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए पुलिस ने मथुरा-वृंदावन को आठ जोन और 37 सेक्टरों में बांटा है। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि मुख्य आयोजन श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारिकाधीश और वृंदावन में होंगे। इसके लिए इन तीनों स्थलों पर अलग-अलग सुरक्षा का प्लान बनाया गया है। इसमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े क्षेत्र को तीन जोन और 17 सेक्टरों में बांटा गया है। द्वारिकाधीश मंदिर क्षेत्र को एक जोन और दो सेक्टर तथा वृंदावन को 4 जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान क्षेत्र में भीड़ का दबाव रात 11 बजे से 1.30 बजे तक रहता है, जबकि वृंदावन में बिहारीजी मंदिर पर मंगला आरती पर यह स्थिति देखने को मिलेगी। यहां इस बार भी कोर्ट के आदेश पर 500 दर्शनार्थियों को रहने की अनुमति रहेगी। वृंदावन में ट्रैफिक प्लान एक दिन पहले प्रभावी हो जाएगा। ई-रिक्शा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसमें पांचजन्य प्रेक्षागृह, रसखान समाधि, परसौली चंद्र सरोवर, श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच तथा वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान में बड़े कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा 20 छोटे मंचों पर प्रस्तुतियां होंगी। इसमें पोतरा कुंड, महाविद्या चौराहा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि गेट नं-3, मसानी मुकुंद बिहार के पास, डीग गेट सब्जी मंडी, भूतेश्वर तिराहा, रेलवे स्टेशन माल गोदाम रोड गेट नं-2 के सामने, बीएसए कॉलेज, नया बस अड्डा, कृष्णापुरी तिराहा, गोवर्धन चौराहा, गोवर्धन थाने के पास, सलेमपुर रोड जयगुरूदेव मंदिर के पास, रेलवे स्टेशन गेट नं-3 धौलीप्याऊ, बल्देव में बस स्टैंड के पास, गोकुल में मंदिर के पास, महावन चौरासी खंभा मंदिर, नंदगांव रंगीली चौक, गोविंद देव मंदिर के पास तथा इस्कॉन मंदिर के पास कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा प्रमुख स्थानों पर 17 सेल्फी प्वाइंट बनेंगे और 20 प्रमुख चौराहे और विभिन्न घाट रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग होंगे।
50 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के मथुरा आने का अनुमान है। बैठक में परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर दर्शन के लिए देश भर से लाखों भक्त मथुरा आते हैं। साल दर साल यह संख्या बढ़ रही है। इसलिए इस बार करीब 50 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिए इंतजाम भी भीड़ के हिसाब से किए जाएं। परंपराओं का भी ध्यान रखा जाए, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालु सुखद अनुभूति का एहसास कर सकें।




