7 लाख की ठगी के चलते 10वीं मंजिल से कूदकर युवती ने की थी आत्महत्या

तीन महीने बाद टेलीग्राम चैट से पकड़े गए 5 ठग

फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद में एक 24 साल की महिला युक्ति जिंदल को 7 लाख रुपये का चूना लगाकर आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले गिरोह के पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। युक्ति एक फाइनेंस प्रोफ़ेशनल थी। उसे नौकरी का झांसा देकर इस धोखाधड़ी में फंसाया गया था। यह घटना तीन महीने पहले की है, जब युक्ति ने अपने घर की 10वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। शुरुआती जांच में पता चला कि युक्ति वर्क फ्रॉम होम जॉब की तलाश में थी, तभी इस गिरोह ने उसे अपने जाल में फंसाया। गिरोह ने उसे वेबपेज और वीडियो की समीक्षा लिखने और लाइक करने के बदले अच्छा पैसा देने का वादा किया था।शुरुआत में युक्ति को अच्छा मुनाफा भी हुआ, जिससे उसका विश्वास बढ़ गया। बाद में गिरोह ने उसे और पैसे निवेश करने के लिए लालच दिया। युक्ति ने विश्वास में आकर 5 लाख रुपये का लोन लिया और सारा पैसा उनके बताए गए स्कीम में लगा दिया। जब युक्ति ने पैसे निकालने चाहे तो उसे पता चला कि वह ठगी का शिकार हो गई है। गिरोह ने उसके लिए जो खाता बनाया था, उससे पैसे नहीं निकल रहे थे। गिरोह के लोग भी अब उससे संपर्क नहीं कर रहे थे।
पुलिस का मानना है कि लोन चुकाने और अपने पैसे वापस पाने के दबाव में युक्ति ने इतना बड़ा कदम उठाया होगा। युक्ति के पिता अनिल कुमार की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी, आत्महत्या के लिए उकसाने, आपराधिक सायंत्र, सबूत मिटाने और सबूतों के तौर पर दस्तावेज नष्ट करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। मामले की जांच फ़रीदाबाद पुलिस की साइबर सेल को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि युक्ति पुणे की एक निजी कंपनी में काम करती थी। लेकिन नौकरी की तलाश में होने के कारण वह इस जालसाजी का शिकार हो गई।
जांच अधिकारी दिनेश त्यागी ने बताया कि यह एक सामान्य कार्य आधारित धोखाधड़ी थी। महिला को शुरुआत में कुछ आकर्षक रिटर्न मिले। लेकिन फिर, उसे अधिक रिटर्न के लिए और निवेश करने के लिए लालच दिया गया। वह उनकी योजनाओं में पैसा लगाती रही। इतना भरोसा था कि उसने 5 लाख रुपये का कर्ज भी लिया और पूरी रकम उनकी योजनाओं में लगा दी। गिरोह ने शुरू में बहाने बनाए जब उसने उनसे रिटर्न के बारे में पूछा। लेकिन उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है। जब गिरोह ने उसके लिए जो खाता बनाया था, उसने उसे पैसे वापस नहीं निकालने दिए। जालसाज भी संपर्क से दूर हो गए थे।
त्यागी ने कहा कि वह बहुत दबाव में रही होगी, न जाने कर्ज कैसे चुकाना है या पैसे कैसे वसूलने हैं। वह अगले दिन अपने 10वीं मंजिल वाले फ्लैट से उनकी मौत के मुंह में कूद गई। साइबर सेल ने युक्ति की टेलीग्राम चैट और बैंक लेनदेन की भी जांच की। पैसे के लेन-देन के आधार पर पुलिस उत्तर प्रदेश के बागपत के निवासी रिजवान अहमद तक पहुंची। 6 अगस्त को उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि धोखाधड़ी की रकम में से 50,000 रुपये उसके केनरा बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
रिजवान ने बताया कि गिरोह के लिए बैंक खाते मुहैया कराने वाले दानिश, हैदर और विमल का भी इस मामले में हाथ है। तीनों को गुरुवार को दिल्ली के गणेश नगर से गिरफ्तार किया गया। गिरोह की तरफ से युक्ति से बातचीत करने वाले प्रशांत को भी गणेश नगर से गिरफ्तार किया गया है। प्रशांत ने ही रिजवान और अन्य लोगों को गिरोह में शामिल होने और कमीशन के बदले में अपने बैंक खाते इस्तेमाल करने के लिए राजी किया था।

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