पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब, आईएसआई-फौज-आतंकियों की सीक्रेट बैठक

ऑपरेशन सिंदूर में तबाह टेरर कैंप बनाने का काम शुरू

इस्लामाबाद/एजेंसी। इस साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 6 और 7 मई की रात को ऑरपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के पंजाब और कश्मीर में हमला करते हुए इंडियन आर्मी ने कई आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने बार-बार ये कहा कि भारत ने झूठा आरोप लगाते हुए उस पर हमले किए, उसकी जमीन पर कोई टेरर कैंप नहीं चल रहा है। हालांकि ऑपरेशन सिंदूर के दो महीने से भी कम समय में पाकिस्तान ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। पाकिस्तान ने उन ठिकानों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है, जिनको भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में तोड़ा था।
शीर्ष खुफिया सूत्रों का हवाला से की गई रिपोर्ट में बताया है कि पाकिस्तान ने भारत के सैन्य हमलों में नष्ट किए गए आतंकवादी लॉन्चपैड और आतंक की ट्रेनिंग देने वाले शिविरों को फिर से बनाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सेना, जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और सरकार के पूर्ण समर्थन से आतंकी बुनियादी ढांचे के इन महत्वपूर्ण केंद्रों को फिर से बनाने का काम चल रहा है। खासतौर से पीओके में ये काम जोरशोर से चल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कोशिश नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास जंगलों में छोटे, हाईटेक आतंकी ठिकाने स्थापित करने की है। भारत के बॉर्डर के आसपास इन ठिकानों को थर्मल, रडार और सैटेलाइट सिग्नेचर को छिपाने वाली तकनीक से लैस किया जा रहा है। इतना ही नहीं पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता का दुरुपयोग करते हुए इस पैसे का इस्तेमाल टेरर कैंपों के पुनिर्निर्माण में कर रहा है।पाकिस्तान जिन आतंकी ठिकानों की मरम्मत के काम में लगा है, उनमें- लूणी, पुतवाल, टीपू पोस्ट, जमील पोस्ट, उमरानवाली, चापरार फरवर्ड, छोटा चक और जांगलोरा शामिल हैं। इसके अलावा नए ठिकाने केल, सरदी, दुधनियाल, अथमुकाम, जुरा, लिपा, पचीबन, काहुटा, कोटली, खुइरट्टा, मंढार, निकाईल, चमनकोट और जानकोट जैसे क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं। इन नए ठिकानों को घने जंगलों के बीच बनाया जा रहा है।
रिपोर्ट कहती है कि आईएसआई ने बड़े ट्रेनिंग कैंप बनाने के बजाय अपने प्रशिक्षण को छोटे शिविरों में फैला दिया है। इनमें 200 से कम युवाओं को रखकर आतंक की ट्रेनिंग दी जा रही हैं। इन मिनी-कैंपों की सुरक्षा विशेष रूप से प्रशिक्षित पाकिस्तानी सेना इकाइयां कर रही हैं। इनकी थर्मल सेंसर और एंटी-ड्रोन सिस्टम से निगरानी की जा रही है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, भारतीय एजेंसियों ने कुछ ऐसे कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट किया है, जिससे इससे पता चलता है कि बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और द रेजिस्टेंस फ्रंट के वरिष्ठ कमांडरों के साथ आईएसआई के अफसरों की बैठक हुई है। बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय पर भी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमला हुआ था।
बहावलपुर की बैठक में आतंकी ढांचे के पुनर्निर्माण, नेतृत्व भूमिकाओं को फिर से सौंपने और पाकिस्तान और कश्मीर में टेरर भर्ती प्रयासों को तेज करने पर चर्चा की गई। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई इस बैठक के बाद ये आतंकी गुट, पाक सेना, आईएसआई और सरकार मिलकर टैरर कैंपों को फिर से खड़ा करने में लग गई हैं। इसके लिए एक बड़ी रकम खर्च की जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button