किम जोंग उन ने हथियार फैक्टरियों का दौरा किया, युद्ध से जुड़ी तैयारियां तेज करने का संकल्प लिया

सियोल। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने तोपखानों और परमाणु संपन्न बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए प्रक्षेपण यान बनाने वाली फैक्टरियों समेत देश के अहम हथियार उत्पादन केंद्रों का दौरा किया और अपनी सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने के प्रयास तथा युद्ध से जुड़ी तैयारियां तेज करने का संकल्प लिया। किम का यह तीन दिवसीय दौरा ऐसे वक्त में हुआ है, जब उत्तर कोरिया के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अमेरिका और दक्षिण कोरिया इस महीने संयुक्त सैन्य अभ्यास के अगले चरण की शुरुआत के लिए तैयार हैं। उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण और अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों के कारण कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव उच्च स्तर पर है।
किम इन सैन्य अभ्यासों को आक्रमण का अभ्यास बताते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि किम का हथियार फैक्टरियों का दौरा रूस के साथ संभावित सैन्य सहयोग से जुड़ा हो सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अन्य देशों से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में सहयोग देने की अपील की है, जिसके तहत उत्तर कोरिया मॉस्को को हथियार और गोला-बारुद की आपूर्ति कर सकता है। उत्तर कोरिया की आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ के अनुसार, किम ने बड़े कैलिबर की तोपें बनाने वाली एक अज्ञात फैक्टरी का निरीक्षण करने के दौरान ‘‘उत्तर कोरिया की युद्ध संबंधी तैयारियों में फैक्टरी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और कार्यों’’ पर जोर दिया।
केसीएनए के मुताबिक, किम ने गोलों की गुणवत्ता में सुधार लाने, प्रणोदक ट्यूब के निर्माण की अवधि घटाने और विनिर्माण की गति बढ़ाने के लिए ‘‘वैज्ञानिक और तकनीकी कदम’’ उठाने के फैक्टरी के प्रयासों की सराहना की, लेकिन नये प्रकार के गोले बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। एक अन्य फैक्टरी में किम ने कहा कि सेना के लिए वाहनों की आपूर्ति बढ़ाना शीर्ष प्राथमिकता है और उन्होंने उत्पादन के लिए एक ‘‘ठोस नींव’’ तैयार करने के वास्ते कर्मियों की तारीफ की। किम ने हथियारों की एक छोटी फैक्टरी का भी दौरा किया और सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों को उन्नत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। अमेरिका और दक्षिण कोरिया से बढ़ते टकराव के मद्देनजर किम रूस तथा चीन से अपनी साझेदारी मजबूत करने पर कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही वह अपने आपको कूटनीतिक रूप से अलग-थलग किए जाने की कोशिशों को चुनौती दे रहे हैं और अमेरिका के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चे में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं।

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