गाजियाबाद में फर्जी दस्तावेज दिखाकर ले लिया 3 करोड़ का लोन, नहीं भरी किश्‍त, अब खोज रहा बैंक

In Ghaziabad, a loan of Rs 3 crore was taken by showing fake documents, the installment was not paid, now the bank is looking for it

गाजियाबाद। गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन एरिया में शातिरों ने दो बैंकों से फर्जी कागजात के जरिए 3 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन करवा लिए। मामले का खुलासा होने पर बैंक प्रबंधन की ओर से संबंधित थानों में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। डीसीपी से शिकायत पर एंटी फ्रॉड सेल की जांच के बाद दोनों मामलों में अलग-अलग थानों में नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।वैशाली सेक्टर-14 स्थित आईसीआईसीआई बैंक की शाखा के अधिकृत अधिकारी नवीन सेमवाल की शिकायत पर कौशांबी थाने में प्रीति चौबे, हेमलता चौधरी, कमलेश, जयकिशन पटेल और सुनीता देवी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। नवीन सेमवार के अनुसार प्रीति चौबे ने साल 2021 में बैंक से संपर्क किया था।
उन्होंने बताया था कि वह द प्योर टेक सॉल्युशंस की संचालिका हैं और अपने चार कर्मियों का वेतन खाता खोलना चाहती हैं। प्रीति ने हेमलता समेत चारों का वेतन खाता खुलवा दिया, जिनमें करीब डेढ़ साल तक हर माह वेतन के रूप में कुछ रकम ट्रांसफर की जाती रही। मई 2022 में वेतन खाते के आधार पर हेमलता और जयकिशन ने क्रेडिट कार्ड ले लिए। हेमलता ने कमलेश और जयकिशन ने सुनीता के साथ संयुक्त रूप से पर्सनल और हाउस लोन भी लिया। सभी लोन जून 2022 से अक्टूबर 2022 के बीच लिए गए।
शुरुआत में कुछ किश्त भरने के बाद सभी फरार हो गए। कंपनी के पते पर बैंक की टीम पहुंची तो वहां न तो फर्म मिली और न ही दिया गया पता था। हेमलता पर क्रेडिट कार्ड के बकाया 13.18 लाख, पर्सनल लोन 13.59 लाख व हाउस लोन 59.20 लाख और जयकिशन पर क्रेडिट कार्ड के बकाया 1.04 लाख व हाउस लोन के 73.62 लाख रुपये बकाया हैं। बैंक का इन पर कुल 1.61 करोड़ बकाया था, जो अब लगभग 2.59 करोड़ रुपये हो चुका है।
दूसरे मामले में वसुंधरा सेक्टर-17/18 स्थित एसबीआई की शाखा प्रबंधक ज्योति सिंह ने थाना इंदिरापुरम में मीना रानी, जॉनी, अमित मलिक और कोमल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। चारों ने खुद को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लेक्चरर बताकर बैंक में पर्सनल लोन के लिए आवेदन दिया था। मई-जून 2023 में चारों ने विवि के पते और फर्जी वेतन पर्ची लगाकर आवेदन दिए थे। बैंक ने अपनी लिस्टेड फर्म मैसर्स रिद्धि कॉरपोरेट सर्विसेज लिमिटेड से इनका सत्यापन कराया। इसके बाद इन्हें लोन दे दिया गया।
एक या दो किस्त देने के बाद लोन का भुगतान नहीं हुआ तो बैंक ने जांच की। पड़ताल में सामने आया कि चारों से कोई भी विवि में न कार्यरत है और न ही वहां रहता है। शिकायत के मुताबिक मीना पर 15.36 लाख, जोनी पर 4.63 लाख, अमित मलिक पर 15.11 लाख और कोमल पर 14.12 लाख रुपये का बकाया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button