टीकमगढ़ के ‘दशरथ मांझी’, पत्नी की बात सुन बंजर जमीन से निकाल दिया पानी
5 एकड़ की धरती में फैली हरियाली, लहलहा रही फसल

टीकमगढ़/मध्य प्रदेश। कहते हैं कि लगन और हिम्मत अगर साथ दे तो इंसान कुछ भी कर सकता है। ऐसा ही काम कर दिखाया है टीकमगढ़ जिले के जमुनिया खेरा गांव के एक आदिवासी दंपति ने। उन्होंने अपनी 5 एकड़ जमीन को हरा-भरा करने के लिए 15 फीट गहरा कुआं खोद दिया। दरअसल, जिले की बड़ागांव तहसील के अंतर्गत आने वाले जमुनिया खेरा गांव में एक आदिवासी बुजुर्ग दंपति ने अपनी 5 एकड़ बंजर जमीन को हरा भरा करने के लिए 5 साल में 15 फीट गहरा कुआं खोद डाला। 65 साल दीपचंद आदिवासी बताते हैं कि उनकी जमीन बंजर थी जिसमें कुछ पैदा नहीं होता था। तब उनकी पत्नी ने बंजर जमीन को हरा-भरा करने के लिए कुआं खोदने की बाद कही।
जब दंपति ने सारे प्रयास कर लिए और सफलता नहीं मिली तो अपने पत्नी के साथ उन्होंने प्रण लिया कि खुद कुआं खोदकर इस जमीन को वह हरा भरा करेंगे। दोनों कपल ने कुआं खोदना शुरू किया। करीब 5 सालों के कठिन परिश्रम के बाद आखिरकार उन्होंने 15 फीट कुआं खोद डाला। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तो कुआं कच्चा ही रहा। लेकिन अब कुएं को पक्का बनाने के लिए दीपचंद पत्थर लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
दीपचंद ने बताया कि उनके बच्चे भी समय-समय पर उनका सहयोग करते रहते हैं। दीपचंद ने बताया कि जब उन दोनों ने सहयोग से कुआं खोदा तो वहीं उनकी संतानों गांव से पलायन कर शहरों में काम करने के लिए गए। दीपचंद की चार बेटियां और एक बेटा है। वे परिवार के भरण पोषण के लिए समय-समय महानगरों में काम करते हैं। हालांकि इस बीच दंपति कुएं की खुदाई करते रहे।
दीपचंद बताते हैं कि उन्होंने काफी पहले खेत में कुएं को बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे। लेकिन जब कहीं बात नहीं बनी तो उन्होंने स्वयं कुआं खोदने का प्रण लिया। आखिकार 5 सालों की कठिन परिश्रम के बाद उन्होंने इसे चरितार्थ किया है।
बुजुर्ग दीपचंद आदिवासी का कहना है कि उन्हें अभी तक शासन की एक भी योजना का लाभ नहीं मिला है। ना तो परिवार का राशन कार्ड बना और ना ही पीएम आवास योजना का लाभ मिला है। इसके बाद भी उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
बुजुर्ग आदिवासी दंपति का कहना है कि उनके लिए सरकारी योजनाएं सफेद हाथी हैं क्योंकि वह लंबे समय तक अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। परिवार ने बेटियों की शादी के लिए व्यापारियों से लोन लिया जिसे खेती से चुकाया।
मध्य प्रदेश और भारत सरकार द्वारा आदिवासियों के कल्याण के लिए करीब 45 योजनाएं संचालित हैं लेकिन यह योजनाएं कहां संचालित हैं कहना ना मुमकिन है अधिकारियों के दावे और सरकार की योजनाओं की हकीकत इस पूरी कहानी से आपको मालूम हो जाएगी।



