ट्राई की सख्ती: टीवी चैनलों पर प्रति घंटे सिर्फ 12 मिनट का विज्ञापन, पालन करने के निर्देश

नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने टेलीविजन प्रसारकों को प्रति घंटे 12 मिनट की विज्ञापन सीमा का सख्ती से पालन करने की बात कही है। हालांकि, विज्ञापन पर लगने वाली यह सीमा न्यायालय में विचारधीन है, इसके बावजूद इसे लागू किया गया है। दरअसल, 18 नवंबर 2025 को जारी कारण बताओ नोटिस के बाद हालिया बैठक में ट्राई ने अपना रुख दोहराया और संकेत दिया कि अंतिम अदालती फैसले तक नियम की वैधता बरकरार है।
ट्राई अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में नियम लागू है और प्रसारकों का पालन अनिवार्य है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है, लेकिन नियम पर स्पष्ट स्थगन नहीं है। नियामक अब प्रसारकों की प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन कर रहा है और आगे की कार्रवाई बाद में तय करेगा।
विज्ञापन की सीमा ट्राई के 2012 के विज्ञापन कैप विनियमों और 2013 के सेवा गुणवत्ता विनियमों से निकली है। इसमें कहा गया है कि कोई भी टेलीविजन प्रसारक किसी कार्यक्रम के प्रसारण में एक घंटे में बारह मिनट से अधिक के विज्ञापन नहीं दिखाएगा।
केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 भी यही प्रावधान रखता है, जिसके तहत 10 मिनट वाणिज्यिक विज्ञापन और 2 मिनट चैनल प्रोमोशन चलाया जाना शामिल है।
गौरतलब है कि टेलीविजन उद्योग पहले से वित्तीय संकट झेल रहा है। टीएएम एडएक्स डेटा के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों में विज्ञापन मात्रा में सालाना 10% गिरावट आई है। उद्योग अधिकारियों की मानें तो एक ओर जहां, परिचालन लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सदस्यता और विज्ञापन राजस्व दबाव में हैं।
एक वरिष्ठ प्रसारण अधिकारी ने कहा कि लागत बढ़ रही है, राजस्व दोनों मोर्चों पर प्रभावित है। इस समय अतिरिक्त नियामक बाधा सहन करना मुश्किल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा और घटते मुद्रीकरण ने स्थिति बदतर बना दी है। प्रसारकों का तर्क है कि नियम मौजूदा बाजार हालात से मेल नहीं खाता और डिजिटल मीडिया पर कोई सीमा नहीं है।

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