हाथ में तिरंगा लेकर कैबिनेट मंत्रियों के साथ सड़क पर उतरे छत्तीसगढ़ के सीएम
Chhattisgarh CM took to the streets with cabinet ministers holding the tricolour in their hands

- रायपुर में पदयात्रा में शामिल हुए सीएम साय
- संविधान दिवस पर पद यात्रा का हुआ आयोजन
- सीएम के साथ मौजूद थे कई कैबिनेट मिनिस्टर
- कहा- संविधान को आत्मसात किए हुए 75 साल हो गए
रायपुर/एजेंसी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को अपने कैबिनेट के कई मंत्रियों के साथ सड़क पर पैदल निकले। मुख्यमंत्री और मंत्रियों को सड़क पर पैदल चलते देख लोग भौचक्के रह गए। दरअसल, संविधान दिवस के मौके पर राजधानी रायपुर में पदयात्रा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। संविधान दिवस पदयात्रा पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय सभागृह से प्रारंभ होकर अंबेडकर चौक पर समाप्त हुई। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और कई कैबिनेट मंत्री शामिल हुए। सीएम ने भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय सभागृह में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा हमारा संविधान भारत की सदियों पुरानी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का आइना है। यह संविधान हमारे सदियों के संघर्ष, अनुभव और उपलब्धियों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज के दिन 26 नवंबर से संविधान दिवस 2024 के आयोजन की शुरुआत हुई है। आज भारत के संविधान को आत्मसात किए 75 वर्ष पूरे हो गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी हमारे संविधान की एक बड़ी विशेषता है कि इसमें परिवर्तनशील समय के अनुरूप आवश्यकता पड़ने पर संशोधन का भी प्रावधान है। हमारे संविधान निर्माताओं ने देश पर अपनी इच्छाओं और विचारों को लादा नहीं, बल्कि अपनी दूरदर्शिता से भावी पीढ़ी के लिए यह गुंजाइश छोड़ी कि वह अपने समय की परिस्थितियों, अपने समय के ज्ञान, अपने समय की आवश्यकताओं के अनुसार इसमें संशोधन कर सकें।
कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि संविधान दिवस के इस गौरवशाली पल में हमें लोगों को संविधान प्रदत्त अधिकारों एवं हमारे मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। संविधान सभा ने दो वर्ष 11 माह 18 दिन में संविधान का निर्माण किया। भारत का यह संविधान पूरे विश्व के लिए आदर्श है। संविधान केवल किताब ही नही, अपितु लोकतंत्र के जीवन का दर्शन है। संविधान कर्तव्यों और अधिकारों का निर्धारण करता है। यह देश की एकता और अंखडता का सूचक है।




