जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पहले दिन हंगामा, भाजपा-नेकां विधायकों में धक्कामुक्की
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को जबर्दस्त हंगामा हुआ। एनएचएम कर्मचारियों के प्रदर्शन और बिजली रेट के मुद्दे पर बीजेपी विधायकों ने तख्तियों और बैनर के साथ नारेबाजी की। हंगामे के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों से उनकी धक्का-मुक्की हुई।

श्रीनगर,एजेंसी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन में विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों, बिजली दरों में बढ़ोतरी और दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों के बीच नारेबाजी और धक्कामुक्की की स्थिति बनी, जिसके बाद मार्शल को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सत्र की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर द्वारा पूर्व मंत्रियों डॉ. शेख मुस्तफा कमाल, धर्मपाल और गुलाम हसन खान के निधन पर शोक प्रस्ताव पढ़ने के साथ हुई। इसके बाद प्रश्नकाल शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। वे पोस्टर और बैनर लेकर सदन में पहुंचे थे, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों के साथ न्याय, बिजली दरों में बढ़ोतरी वापस लेने और दिहाड़ी मजदूरों को नियमित करने जैसी मांगें दर्ज थीं।
विरोध कर रहे भाजपा विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और बाद में वहां धरने पर भी बैठ गए। इस दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों की ओर से भी नारेबाजी की गई। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद सदन में धक्कामुक्की की स्थिति बनी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मार्शल को हस्तक्षेप करना पड़ा। हंगामे के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन में अपनी बात रखते रहे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी विपक्ष के विरोध के केंद्र में रहे। कर्मचारियों की ओर से नौकरी संबंधी नीति, सेवा सुरक्षा, सेवानिवृत्ति लाभ, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी भविष्य निधि कवरेज सहित विभिन्न मांगें उठाई जा रही हैं। भाजपा विधायकों ने इन मांगों के साथ बिजली दरों और दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण का मुद्दा भी सदन में उठाया।
इसी दौरान पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के पुलवामा विधायक वहीद-उर-रहमान पारा ने आरक्षण नीति से जुड़े मुद्दों पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी उठाई गई। सत्र के दौरान रोजगार, आरक्षण, बिजली दर और सरकारी सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों ने अपनी-अपनी मांगें रखीं।
लगातार हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही बाधित हुई और अध्यक्ष ने सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात बैठक वाला शरदकालीन सत्र 21 सितंबर से शुरू हुआ है और अगले दिन सदन की बैठक निर्धारित है।




