गूगल, एचएसबीसी और केब्यूटी के कभी असाइंटमेंट किए, अब मुंबई लोकल में जोया थॉमस लोबो मांग रहीं भीख

Zoya Thomas Lobo, who once did assignments for Google, HSBC and KBeauty, is now begging in Mumbai local

  • फिल्मी कहानी से कम नहीं है जोया का चुनौती भरा सफर
  • कोराना के दौरान सुर्खियों में आई थीं जोया थॉमम लोबो
  • अब मुंबई की लोकल ट्रेनों में दो वक्त की रोटी जुटाने को मजबूर

मुंबई/एजेंसी। जोया थॉमस लोबो, जी हां हम बात कर रहे हैं देश की पहली ट्रांसजेंडर फोटो जर्नलिस्ट की। जोया एक ऐसी शख्सियत हैं, जिनकी जिंदगी संघर्ष के साथ ही उम्मीदों से भरी हुई है। अपनी मेहनत और टैलेंट की बदौलत उन्होंने फोटो जर्नलिज्म की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल किया और देश की दूसरी अन्य ट्रांसजेंडर्स के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं, हालांकि उतार-चढ़ाव उनकी कहानी का हिस्सा आज भी बना हुआ है। कोरोना महामारी के दौरान मशहूर हुई जोया के पास आजकल काम का संकट हैं, लेकिन इस संकट के बावजूद उनकी उम्मीदें अब भी कायम हैं।
जोया का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने अपनी मेहनत और जुनून से फोटो जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा और जल्द ही गूगल, एचएसबीसी और केब्यूटी जैसी अन्य बड़ी कंपनियों से असाइनमेंट्स हासिल किए। एक टीवी न्यूज चैनल में भी काम किया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनके हाथ से वो अवसर निकलते गए। आज जोया को असाइनमेंट नहीं मिल रहे हैं, और यही कारण है कि वह मुंबई की लोकल ट्रेनों में भीख मांगने को मजबूर हैं। फिलहाल जोया मुंबई के बांद्रा इलाके के एक स्लम में किराए पर रहती हैं।
जोया के लिए यह समय काफी कठिन है, क्योंकि एक समय था जब वह प्रमुख ब्रांड्स और कंपनियों के लिए काम करती थीं। एक ट्रांसजेंडर महिला होने के कारण जोया को पहले ही समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ा और अब पेशेवर दुनिया में भी उन्हें उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। जोया ने एनबीटी को बताया कि मेरे रूम का किराया ही 4000 रुपये है। इसके अलावा लाइट और पानी का बिल, राशन का खर्च भी है। मुझे कोई काम नहीं मिल रहा है, इसलिए मैं लोकल ट्रेनों में भीख मांग रही हूं। कठिनाई तो बहुत है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी है।
एक ट्रांसजेंडर के तौर पर जोया ने समाज में एक अलग पहचान बनाई थी, लेकिन अब वह उन मौकों की तलाश में हैं, जो उन्हें एक बार फिर से समाज के घेरे के केंद्र में लाकर खड़ा कर दें, जहां किसी को भी सम्मान मिलता है। हालांकि, जोया का जज्बा और संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। वह इस मुश्किल दौर के दरिया को पार करने की कोशिश कर रही हैं। वह उम्मीद करती हैं कि समाज उनके संघर्ष को समझेगा और उन्हें वह अवसर मिलेगा, जिसके वह पूरी तरह से हकदार हैं।
जोया ने बताया कि मुझे अब भी उम्मीद है कि उन्हें उनकी कला के ज़रिए मान-सम्मान मिलेगा। मैं एक बेहतरीन फोटो लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को गिफ्ट करना चाहती हूं। शायद उन्हें मेरा काम पसंद आए और उनके जरिए मुझे काम का कोई अच्छा अवसर मिल जाए।
जोया ने बताया कि तेजी से विकसित होते हमारे देश में आज भी ट्रांसजेंडरों को एक अलग नजरिए से देखा जाता है। कुछ महीनों पहले मुझे एक पत्रकार ने इंटरव्यू के लिए एक कॉफी शॉप पर बुलाया था, जैसे ही मैं वहां पहुंची, तो वहां गार्ड ने मुझे अंदर नहीं जाने दिया, क्योंकि मैं ट्रांसजेंडर हूं। फिर मुझे अंदर जाने के लिए उस पत्रकार को बुलाना पड़ा। जोया ने कहा कि मुझे बॉलिवुड सेलिब्रिटी की फोटोग्राफी करनी है, लेकिन इस बीच मेरे साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटीं, जहां कुछ नए फोटोग्राफर ने मुझे कुछ अजीब कमेंट्स किए और मेरा मज़ाक उड़ाया। हालांकि, इन घटनाओं से मनोबल काफी टूटता है, लेकिन कई ऐसे सीनियर फोटोग्राफर्स है, जो बहुत अच्छे हैं और मेरी मदद करते हैं।
जोया ने बताया कि उन्हें संगीत का शौख पहले से ही था, ट्रेन और दुकानों से पैसे मांगने के बाद उन्होंने बचे हुए पैसों से बोरा बाजार की एक दुकान से पहली बार एक वायलन खरीदा था। वह वायलन खरीदकर आ ही रही थीं कि उनकी नजर एक कैमरे की दुकान पर पड़ी। उन्होंने अपना पहला सेकंड हैंड कैमरा वहीं से खरीदा। उसी कैमरे से वह स्ट्रीट फोटोग्राफी करने लगीं। फिर एक दिन वह स्टेशन पर बैठ कर एक शॉर्ट फिल्म ‘हिजरा श्राप या वरदान’ देख रही थीं, तभी उन्हें फिल्म में ट्रांसजेंडर की भूमिका कुछ ठीक नहीं लगी। इसके बाद वे जैसे-तैसे कर फिल्म मेकर्स से मिलीं, तभी मेकर्स ने जोया को शॉर्ट फिल्म के दूसरे भाग में अभिनय करने का मौका दिया।
इसी शॉर्ट फिल्म की सक्सेस पार्टी में जोया कॉलेज टाइम्स एजुकेश मीडिया के मालिक से मिलीं। उन्होंने जोया की इंग्लिश स्पीकिंग और कॉन्फिडेंस देख उन्हें अपने वीकली न्यूजपेपर में जर्नलिस्ट का काम दिया। इसके बाद वह प्राइड रैली कवर करने गई, तब वहां जोया को वरिष्ठ फोटोग्राफर सोलंकी मिले और उन्होंने जोया को फोटो जर्नलिज्म के बारे में बताया। जोया ने उनसे फोटोग्राफी के बारे में बहुत कुछ सीखा। कोविड के दौरान जोया ने गांव जाने के लिए प्रदर्शन कर लोगों की फोटो ली। उनके द्वारा ली गई फोटो कैनेडियन प्रेस एजेंसी ने ली और फिर उनके करियर को उड़ान मिली।

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