73 साल बाद पाकिस्तान को मिलेगी आईएमएफ और विश्व बैंक के बोर्ड की अध्यक्षता, 2027 में संभालेगा जिम्मेदारी

पाकिस्तान भुगतान संतुलन की जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक सुधारों को समर्थन देने के लिए ऋण लेता रहा है। आरएसएफ जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने के लिए वित्तपोषण देता है।

इस्लामाबाद,एजेंसी। आर्थिक चुनौतियों और विदेशी कर्ज के दबाव का सामना कर रहे पाकिस्तान को वर्ष 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक समूह के संचालन मंडल की अध्यक्षता के लिए नामित किया गया है। पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री और विश्व बैंक में देश के गवर्नर अहद खान चीमा को बैंकॉक में आयोजित आईएमएफ और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठक के दौरान आगामी अध्यक्ष घोषित किए जाने की जानकारी दी गई है। पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 1953 के बाद यह पहला अवसर होगा, जब देश को इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी।
पाकिस्तान सरकार ने इस नियुक्ति को देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि वर्ष 2027 में पाकिस्तान आईएमएफ और विश्व बैंक समूह के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता करेगा। मंत्रालय के मुताबिक, इस भूमिका से पाकिस्तान को वैश्विक आर्थिक और विकास संबंधी मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं में भागीदारी बढ़ाने तथा सदस्य देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलेगा।
191 देशों के प्रतिनिधियों ने लिया वार्षिक बैठक में हिस्सा
12 से 18 अक्टूबर तक आयोजित वार्षिक बैठकों में 191 देशों के 15 हजार से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इन बैठकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास वित्तपोषण, आर्थिक स्थिरता और सदस्य देशों की वित्तीय चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा होती है। ऐसे में बोर्ड की अध्यक्षता पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर अपनी भागीदारी और संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर देगी।
हालांकि, अध्यक्षता मिलने का अर्थ यह नहीं है कि पाकिस्तान को आईएमएफ या विश्व बैंक की नीतियों पर एकतरफा नियंत्रण मिल जाएगा। इन संस्थानों के फैसले उनकी निर्धारित प्रक्रियाओं और सदस्य देशों की भागीदारी के आधार पर लिए जाते हैं।
आईएमएफ के दो कार्यक्रमों से वित्तीय सहायता ले रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिलने जा रही है, जब वह अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और भुगतान संतुलन की चुनौतियों से निपटने के लिए आईएमएफ के वित्तीय कार्यक्रमों पर निर्भर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के लिए सात अरब अमेरिकी डॉलर की विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) और 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर की लचीलापन एवं स्थिरता सुविधा (आरएसएफ) से जुड़े कार्यक्रम चल रहे हैं।
ईएफएफ का उद्देश्य पाकिस्तान की भुगतान संतुलन संबंधी जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने में सहायता करना है। वहीं, आरएसएफ के तहत जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने तथा दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय क्षमता मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
1.2 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता मिलने की संभावना
आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी मिलने पर पाकिस्तान को लगभग 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकती है। यह संभावित राशि दोनों कार्यक्रमों की हालिया समीक्षाओं के संबंध में आईएमएफ के कर्मचारियों और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच हुए समझौते के बाद सामने आई है। हालांकि, अंतिम भुगतान आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक अस्थिरता, विदेशी मुद्रा की जरूरतों और कर्ज चुकाने के दबाव का सामना कर रहा है। देश ने वर्ष 1950 में आईएमएफ की सदस्यता ग्रहण की थी और तब से कई बार वित्तीय सहायता कार्यक्रमों का सहारा लिया है। अलग-अलग समय पर आईएमएफ से मिले राहत पैकेज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन आर्थिक सुधारों, राजस्व बढ़ाने और वित्तीय स्थिरता कायम करने की चुनौतियां बनी हुई हैं।
ऐसे आर्थिक माहौल में वर्ष 2027 के लिए बोर्ड की अध्यक्षता पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चर्चाओं में अहम भूमिका निभाने का अवसर दे सकती है। हालांकि, देश की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान वित्तीय अनुशासन, आर्थिक सुधारों और दीर्घकालिक विकास की चुनौतियों से किस तरह निपटता है।

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