दस साल से वृद्धावस्था पेंशन का इंतजार, बाढ़ में घर भी बहा; 90 वर्षीय समुंद्री देवी की आंखों से छलका दर्द
मोकामा क्षेत्र की 90 साल की बुजुर्ग महिला समुंद्री देवी से जैसे ही वृद्धा पेंशन को लेकर सवाल किया गया तो उनका दर्द छलक गया।

पटना,एजेंसी। “दस बरस हो गईल बाबू, कवनो पइसा न मिलले रहि…” मोकामा के कसहा दियारा की 90 वर्षीय समुंद्री देवी की यह बात वृद्धावस्था पेंशन के लिए उनके लंबे इंतजार और बेबसी की कहानी बयां करती है। पति की मृत्यु के कई वर्ष बाद वृद्धावस्था पेंशन उनके लिए आर्थिक सहारे की उम्मीद बनी थी, लेकिन उनका कहना है कि पिछले करीब 10 वर्षों से उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है।
समुंद्री देवी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें कुछ समय तक पेंशन मिली थी, लेकिन बाद में किसी कारण उनका नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिया गया। इसके बाद से वह लगातार पेंशन से वंचित हैं। उम्र बढ़ने के साथ उन्हें सुनने में भी परेशानी होने लगी है और स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। ऐसे में नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
समुंद्री देवी की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। पटना के दियारा क्षेत्र में आई बाढ़ ने उनका घर भी छीन लिया। अपने घर को याद करते हुए वह भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि बाढ़ के पानी में घर का सामान और जरूरी चीजें तक बह गईं। अब उनके पास अपना घर नहीं है और वह अपनी बेटी के यहां रहने को मजबूर हैं।
पटना के दियारा क्षेत्रों में आई बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। दानापुर, मोकामा के दियारा क्षेत्र और फुलवारीशरीफ समेत कई इलाकों में बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित किया है। ऐसे हालात में बुजुर्ग और कमजोर वर्ग के लोगों के सामने रहने, भोजन और आर्थिक सहायता जैसी चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
बिहार में वृद्धावस्था पेंशन की व्यवस्था राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के तहत वर्ष 1995 से शुरू मानी जाती है। इसके बाद राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना लागू की, जो एक अप्रैल 2019 से प्रभावी हुई। योजना के तहत पात्र बुजुर्ग लाभार्थियों को प्रतिमाह 1100 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में भेजे जाने का प्रावधान है।
समुंद्री देवी की स्थिति वृद्धावस्था पेंशन योजनाओं के वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचने की चुनौती को भी सामने लाती है। ऐसे मामलों में लाभार्थी का नाम सूची से हटने के कारणों की जांच और पात्र बुजुर्गों को समय पर पेंशन उपलब्ध कराना जरूरी हो जाता है, ताकि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें आर्थिक सहारे के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।




