‘गाय का दूध पिएंगे, फिर सड़क पर छोड़ देंगे; फसल खराब होगी तो मुझे दोष देंगे..’, कानपुर में बोले सीएम योगी
कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ में किसानों की आय, गोसंरक्षण और देश के विकास को लेकर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग गाय का दूध लेने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं, जिससे बाद में यही गोवंश फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और लोग सरकार को दोष देते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार का संकल्प है कि गोमाता की रक्षा की जाएगी और देश की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत में सनातन धर्म का पालन करने वाला प्रत्येक व्यक्ति गोमाता को पूजनीय मानता है और उसे परिवार का हिस्सा समझता है। गो आधारित प्राकृतिक खेती न केवल कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाती है, बल्कि गोवंश संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन समय में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी थी, लेकिन विदेशी मॉडल की अंधाधुंध नकल के कारण देश की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने फिर से अपनी क्षमताओं पर भरोसा किया है, जिसके चलते भारत आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले किसान अधिक लागत और कम आय की समस्या से जूझ रहा था, लेकिन वर्तमान सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत का डेढ़ गुना सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया है। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि, सॉइल हेल्थ कार्ड और कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं से किसानों को लाभ मिला है।
मुख्यमंत्री ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती की लागत घटेगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के 34 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें गंगा किनारे के 27 जिलों और बुंदेलखंड के 7 जिले शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य की 7700 से अधिक गोशालाओं में 14 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गोवंश पालन करने वाले किसानों को प्रति पशु 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसानों को आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत का आधार समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर गांव और सशक्त कृषि व्यवस्था है। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों और ऊर्जा संकट के बावजूद भारत मजबूती से आगे बढ़ रहा है, जबकि विपक्ष केवल आलोचना तक सीमित है।



