कोटा में पकडी ओआरएस के नाम से बिक रही फ्रूट ड्रिंक, 110 बोतल सीज

10 रुपए का ओआरएस, 50 रुपए में बेच रहे थे नकली ड्रिंक

कोटा/राजस्थान। जयपुर के बाद अब कोटा में भी ओआरएस के नाम पर फ्रूट ड्रिंक बेचने का मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने ओआरएस को लेकर की गई कार्रवाई में यह खुलासा किया। टीम ने 22,000 मिलीलीटर (110 मूल बोतलों में भरा) ओआरएस ड्रिंक के नाम से बेचे जा रहे पेय को सीज किया है। यह कार्रवाई न्यू अर्जुन विहार प्रथम स्थित एक फर्म पर की गई, जहां 200-200 मिलीलीटर की फ्रूट ड्रिंक बोतलों को भ्रामक तरीके से ओआरएस के रूप में बेचा जा रहा था। गुरुवार को की गई इस कार्रवाई से पहले जयपुर में भी बुधवार को छापा मारा गया था, जहां 1 लाख 93 हजार 200 मिलीलीटर के पैकेट जब्त किए गए थे।
कोटा के सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया कि टीम ने अमृतांजन इलेक्ट्रो रिहाइड्रेट एप्पल ड्रिंक ब्रांड की 110 मूल बोतलों का सैंपल लेने के बाद उन्हें सीज किया। खरीद बिल अमृतांजन हेल्थकेयर लिमिटेड, तमिलनाडु का पाया गया। फार्मेसी डिपो से भी इसी भ्रामक ब्रांड के ड्रिंक का एक सैंपल लेकर 110 बोतलें सीज की गईं। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी चंद्रवीर सिंह, अरुण सक्सेना, संदीप अग्रवाल और मौजी लाल कुंभकार शामिल रहे।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपीकिशन शर्मा ने बताया कि कई कंपनियां ओआरएस के नाम से ऐसे पेय बेच रही हैं, जिनमें डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार इलेक्ट्रोलाइट्स नहीं हैं। इनमें चीनी की मात्रा अधिक है और नकली फ्लेवर मिले होते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हैं। ओआरएस जीवनरक्षक दवा है, जिसमें सभी घटकों की निर्धारित मात्रा होना जरूरी है।
जयपुर में ड्रग एंड फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने 29 अक्टूबर को शहर के विभिन्न मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी कर एनर्जी ड्रिंक पैकेट जब्त किए। ये ड्रिंक ORS जैसे नामों से बाजार में बेचे जा रहे थे, जो मानकों के अनुरूप नहीं थे। जयपुर सीएमएचओ डॉ. रवि शेखावत के अनुसार, राजापार्क स्थित इंडियन फार्मा सेल्स से पांच अलग-अलग फ्लेवर के ड्रिंक पैक के नमूने जांच के लिए लिए गए और 1 लाख 93 हजार 200 मिलीलीटर पैकेट सीज किए गए। मानसरोवर मध्यम मार्ग स्थित अपोलो फार्मेसी पर भी इसी तरह की ड्रिंक पैकिंग पाई गई, जहां से 77 पैकेट जब्त किए गए।
डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि उल्टी या दस्त में कमजोरी दूर करने के लिए बाजार में असली ओआरएस का घोल 10 रुपए में मिलता है, जबकि ये कंपनियां उसी की जगह फ्रूट एसेंस वाले ड्रिंक 45 से 50 रुपए में बेच रही थीं। इन उत्पादों को इस तरह पेश किया जा रहा था कि लोग इन्हें डिहाइड्रेशन या दस्त के इलाज वाला असली ओआरएस मान लेते थे, जबकि हकीकत में ये केवल फ्लेवरयुक्त पेय थे।

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