गोरखपुर जिला अस्पताल में एक ही व्यक्ति को दो बार किया मृत घोषित, दोनों बार वो बेड पर मिला जिंदा
In Gorakhpur district hospital, the same person was declared dead twice, both times he was found alive on the bed

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। यूपी के गोरखपुर जिला अस्पताल बेहतर इलाज के लिए नहीं बल्कि कई बार अपने अजब-गजब कारनामों की वजह से सुर्खियों में रहता है। ताजा मामला बुधवार को सामने आया जब सरजू प्रसाद नाम के एक व्यक्ति को मृत घोषित कर उसका डेथ मेमो जारी कर दिया गया। हालांकि जब मोहल्ले वाले अस्पताल पहुंचे तो सरजू अपने बेड पर जीवित मिला। ऐसा एक सप्ताह में दो बार हो चुका है। अब एसआईसी इसे गंभीर मामला मान कर जांच कराने की बात कर रहे हैं।
मामला गोरखपुर जिला अस्पताल के मेल वार्ड का है। जहां पिछले एक सप्ताह में एक ही व्यक्ति को दो बार मृत घोषित कर दिया गया। वहीं दोनों ही बार वह जीवित मिला। बता दें कि कोतवाली थाना क्षेत्र के चौरहिया गोला के रहने वाले 65 वर्षीय सरजू प्रसाद घर में अकेले ही रहते हैं। पिछले दिनों उनकी तबीयत खराब होने पर कुछ लोगों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। एक दिन बाद ही सूचना मिली कि सरजू प्रसाद की मृत्यु हो गई है। मोहल्ले वाले अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि वह तो जीवित हैं। किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति का डेथ मेमो गलती से उनके नाम से जारी हो गया है। हंगामे के बाद किसी तरह अस्पताल प्रबंधन ने समझा बुझाकर कर मामला शांत कराया।
वहीं बुधवार की रात एक बार फिर से सरजू के मौत की सूचना मिलते ही मोहल्ले वालों के साथ उसकी बहन भी अस्पताल पहुंची। मोर्चरी में रखी डेड बॉडी चेक किया तो वहां सरजू प्रसाद की बॉडी नहीं थी। कुछ लोगों ने वार्ड में जाकर चेक किया तो सरजू अपने बेड पर एक बार फिर जीवित मिले। हंगामें के बीच पहुंचे एसआईसी ने मामला शांत कराया। उन्होंने कहा कि स्टाफ की बड़ी लापरवाही है, क्योंकि उस दिन दो अज्ञात व्यक्तियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से एक की मौत हुई है। गलती से मेमो में सरजू प्रसाद का नाम चढ़ गया है। हम इस घटना में स्टाफ की लापरवाही मानते हैं। इसकी जांच कराई जाएगी।
कर्मचारियों ने इसके लिए सरजू की बहन और मोहल्ले वालों से माफी मांगी। पूर्व में भी कई बार अस्पताल कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से हास्यास्पद स्थिति बन चुकी है। इस बारे में एसआईसी से बात की गई तो उनका कहना था कि मामला बेहद गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी और लापरवाही करने वाले गैर-जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक बार की गलती को माफ किया जा सकता है और यदि वही गलती दो बार हो तो वह अक्षम्य है।




