कानपुर से जुड़े पेपर लीक मामले के तार,आरोपित वकील की गिरफ्तारी पर पुलिस से हाथापाई,इंस्पेक्टर लाइन हाजिर

कानपुर/उत्तर प्रदेश। पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कराने वाले गिरोह के जाल कानपुर में भी फैला हुआ है। रविवार को गोविंदनगर पुलिस ने इस प्रकरण में शामिल एक वकील और उसके साथी को गिरफ्तार किया तो हंगामा खड़ा हो गया। बड़ी संख्या में वकीलों ने गोविंदनगर थाना घेर लिया। घंटों तक कहासुनी के बाद पुलिस और वकीलों में हाथापाई हो गई। पुलिस का आरोप है कि वकील आरोपितों को छुड़ाकर ले जाने का प्रयास कर रहे थे और जब उन्हें रोका गया तो मारपीट कर दी। जबकि वकील पुलिस पर मारपीट का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि दोपहर बाद इस मामले में पुलिस ही बैकफुट में आ गई और डीसीपी दक्षिण की संस्तुति पर पुलिस आयुक्त ने गोविंदनगर के थाना प्रभारी विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया। हालांकि पुलिस ने आरोपित वकील और उसके साथी को जेल भी भेज दिया।
गुजैनी स्थित रतनचंद खत्री स्कूल में 18 फरवरी को पुलिस विभाग के आरक्षी पद की द्वितीय पाली परीक्षा के दौरान नकल करते कुलगांव के खलार गांव निवासी प्रदीप कुमार को पकड़ा था। उसके पास से लीक हुए पेपर के प्रश्नों के उत्तर लिखी पर्चियां मिली थीं। केंद्र व्यवस्थापक राजकिशोर मिश्र ने उसके खिलाफ गोविंद नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
विवेचक एसआइ पवन कुमार ने बताया कि जांच करने प्रदीप के घर पहुंचे तो उसका बड़ा भाई सुदीप उर्फ राजू मिला था। उसने बताया कि मझेला भाई संदीप ने प्रदीप को पास कराने के लिए पूर्व परिचित साढ़ के कोरथा निवासी अंकित सिंह से संपर्क किया। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। अंकित ने प्रदीप व संदीप को नौबस्ता बसंत विहार निवासी वकील आशीष सचान से मिलवाया था। आशीष ने प्रदीप को पास कराने के लिए पांच लाख रुपए में ठेका लिया था।
जांच में यह भी सामने आया कि आशीष ने संदीप के वाट्सएप पर पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर भी भेजा था। इस पर पुलिस ने संदीप को भी जेल भेजा। सर्विलांस की मदद से शुक्रवार रात अंकित को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर ही शनिवार रात वकील आशीष भी पुलिस के हाथ आ गया।
इसके बाद रविवार की सुबह आशीष को छुड़ाने लायर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हर्ष कुमार, वकील सुशील यादव, अनूप सचान, आशीष शर्मा गोविंद नगर थाने पहुंचे। हर्ष कुमार का आरोप है कि आशीष सचान को पुलिसकर्मी घसीटते हुए मुंशियाने से थाना प्रभारी के कार्यालय ले जा रहे थे। साथी वकीलों ने इसका विरोध जताया तो पुलिसकर्मी उनसे धक्का-मुक्की करने लगे।
इसी बीच थाना प्रभारी विक्रम सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मी पहुंचे और उन चार वकीलों को लात-घूंसों से पीटते हुए जमीन पर बैठाते हुए मोबाइल छीन लिए। इस घटना की सूचना पर अन्य 40-50 साथी वकील भी थाने पहुंचे और थाने का घेराव करते हुए प्रदर्शन किया। एक वकील ने तहरीर भी दी। वह थाना प्रभारी के निलंबन व मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे। एडीसीपी अंकिता शर्मा ने मौके पर पहुंच वकीलों को शांत कराया। एसीपी बाबूपुरवा अमरनाथ ने बताया कि पकड़े गए अंकित और आशीष को जेल भेजा गया है। मामले की जांच की जा रही है।
पांच लाख में सौदा, वकील ने लिए थे 60 हजार एडवांस
विवेचक ने बताया कि पकड़े गए अंकित ने बताया कि आशीष ने प्रदीप को नकल करवाकर परीक्षा में पास करवाने के बदले में पांच लाख रुपये का सौदा किया था, जिसमें संदीप ने 60 हजार रुपये एडवांस भी दे दिए थे। अंकित का कहना था उसने सिर्फ संदीप को आशीष से मिलवाया था।
पुलिस जांच में बर्रा आठ में हाईवे किनारे स्थित होटल में अंकित करीब तीन दिन से कमरा नंबर 202 में छिपा था। अपना मोबाइल नंबर बंद कर रखा था। शुक्रवार रात मोबाइल चालू होते ही लोकेशन ट्रेस कर सादे कपड़ों में दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मी होटल में पहुंचे। उन्होंने कमरों को खंगाला तो 202 नंबर कमरे में वह मिल गया। इसके बाद पुलिस टीम ने होटल की डीवीआर भी कब्जे में ले ली।
पेपर लीक मामले में एसटीएफ शहर में कर रही निगरानी
पुलिस भर्ती परीक्षा में हुए पेपर लीक व नकल करते पकड़े गए व परीक्षा पास कराने का ठेका लेने वाले गिरोह पर एसटीएफ लखनऊ की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। एसटीएफ अब तक पकड़े गए आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों की भी हर गतिविधियों की निगरानी कर रही है। एक पुलिसकर्मी के अनुसार एसटीएफ की एक टीम 18 फरवरी से शहर में ठहरी है,जो इससे संबंधित रिपोर्ट सीधे मुख्यालय भेज रही है।
लाइन हाजिर के सवाल पर अटपटा जवाब
इस पूरेे प्रकरण में डीसीपी दक्षिण रवींद्र कुमार बैकफुट पर नजर आए। पहले वह हंगामे के दौरान मौके पर नहीं पहुंचे और जब उनसे इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर करने का कारण पूछा गया तो वह उसका कोई सही जवाब भी नहीं दे सके। वकील आरोपितों को छुड़ाने आए थे तो इंस्पेक्टर पर कार्रवाई क्यों, तो उन्होंने जवाब दिया कि निष्पक्ष जांच के लिए कार्रवाई की है। वहीं हंगामा करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इस सवाल का जवाब वह नहीं दे सके।




