नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सस्ते घरों की नई व्यवस्था, ईडब्ल्यूएस फ्लैट 4.5 लाख और एलआईजी 9 लाख रुपये से शुरू
नोएडा में बनने वाली ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में बिल्डरों को 10 फीसदी फ्लैट ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी में बनाना होगा। इसके प्रमाणपत्र लेने के बाद ही बाकी फ्लैटों के लिए एनओसी मिलेगी। ईडब्ल्यूएस फ्लैट की शुरुआती कीमत 4.5 लाख रुपये तय की गई है, जबकि एलआईजी फ्लैट 9 लाख रुपये से शुरू होंगे।

नोएडा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किफायती आवास की तलाश कर रहे निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए नई व्यवस्था का रास्ता खुल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के मॉडल भवन विनियम-2026 के तहत ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए कुल फ्लैटों का 10 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित करने का प्रावधान किया है। प्रस्तावित व्यवस्था में ईडब्ल्यूएस फ्लैट की शुरुआती कीमत 4.5 लाख रुपये और एलआईजी फ्लैट की कीमत नौ लाख रुपये रखी गई है।
जानकारी के मुताबिक, मॉडल भवन विनियम-2026 को नौ अक्टूबर को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद संबंधित नियमावली प्राधिकरणों को भेज दी गई है। इसमें किफायती आवासों के आकार, निर्माण, पार्किंग और आवंटन से जुड़े मानक तय किए गए हैं। हालांकि, इन प्रावधानों के स्थानीय स्तर पर लागू होने और आवासों के आवंटन की प्रक्रिया आगे की आधिकारिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
नई व्यवस्था के अनुसार, ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट का कारपेट एरिया 30 से 35 वर्गमीटर और एलआईजी श्रेणी के फ्लैट का कारपेट एरिया 35 से 45 वर्गमीटर होगा। वहीं, प्लॉटेड डेवलपमेंट योजनाओं में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 35 से 40 वर्गमीटर तथा एलआईजी श्रेणी के लिए 40 से 50 वर्गमीटर के भूखंड रखने का प्रावधान है। पार्किंग के लिए ईडब्ल्यूएस आवास में प्रति इकाई दो वर्गमीटर और एलआईजी आवास में चार वर्गमीटर जगह निर्धारित की गई है।
सरकार ने पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा भी तय की है। ईडब्ल्यूएस श्रेणी में तीन लाख रुपये तक और एलआईजी श्रेणी में छह लाख रुपये तक वार्षिक पारिवारिक आय वाले लोग निर्धारित शर्तों के अनुसार पात्र हो सकेंगे। आवेदन, दस्तावेजों और आवंटन से संबंधित विस्तृत नियम आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होंगे।
नियमों में छोटे आवासीय प्रोजेक्टों के लिए भी प्रावधान रखा गया है। चार हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाली परियोजनाओं में विकासकर्ता निर्धारित शेल्टर फीस जमा करने का विकल्प चुन सकता है। हालांकि, इसके बदले प्राधिकरण को उतनी ही संख्या में किफायती फ्लैटों का निर्माण कराना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम आय वाले परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित न रहे।
किफायती आवासों के निर्माण और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी नियमों से जोड़ने की बात कही गई है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, विकासकर्ता को पहले ईडब्ल्यूएस और एलआईजी फ्लैटों का पूर्णता प्रमाणपत्र लेना होगा। इसके बाद ही परियोजना के शेष फ्लैटों के लिए अधिभोग प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इससे किफायती आवासों के निर्माण को प्राथमिकता देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नोएडा में लंबे समय से प्राधिकरण की नई किफायती आवास योजनाओं का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले जनता फ्लैट और श्रमिक कुंज जैसी योजनाओं के माध्यम से निम्न आय वर्ग के लोगों को आवास उपलब्ध कराए जाते थे। दूसरी ओर, निजी आवासीय परियोजनाओं में कीमतें बढ़ने से आम परिवारों के लिए घर खरीदना चुनौतीपूर्ण होता गया है।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, मॉडल भवन विनियम-2026 से संबंधित नियमावली शासन से प्राप्त हो गई है। प्राधिकरण स्तर पर इसका अध्ययन किया जाएगा और बोर्ड की स्वीकृति के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में इच्छुक आवेदकों को फ्लैटों की कीमत, उपलब्धता, आवेदन की तारीख और पात्रता संबंधी अंतिम जानकारी के लिए संबंधित प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।




