पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को मिली जमानत
सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणी करने का था आरोप

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। चौक थाने में दर्ज एक मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को जिला जज की अदालत से शुक्रवार को राहत मिल गयी। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दिया। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव ने दलील दी कि आरोपित को मात्र राजनैतिक विद्वेषवश शासन-प्रश्वासन के दबाव में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपित पूर्व आईपीएस अधिकारी रहा है और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के फलस्वरुप जबरिया सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
पुलिस सेवा से बर्खास्तगी के बाद एक सामाजिक संगठन का गठन कर देश-प्रदेश में हो रहे विधि विरुद्ध कार्यों व सरकारी अधिकारियों व राजनेताओं के भ्रष्ट कारनामों को उजागर करने में लगा था। उसने अपने ट्वीटर हैंडल पर जो पोस्ट किया वह किसी की मान-प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से नहीं,बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता व देश का नागरिक की हैसियत से उक्त आरोपों की विधि सम्मत जांच कराये जाने के उद्देश्य से सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए पोस्ट किया।
वहीं अभियोजन व वादी के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए दलील दिया कि आरोपित पर दस मुकदमों की हिस्ट्रीशीट हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपित को जमानत दे दी। बता दें कि बड़ी पियरी निवासी हिन्दू युवा वाहिनी के नेता एवं बीडीए के मानद सदस्य अम्बरीष सिंह भोला ने चौक थाने में बीते नौ दिसम्बर को मुकदमा दर्ज कराया था।
उन पर आरोप था कि बीते 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन पर आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के झूठे आरोप लगाए गए। साथ ही चर्चित कफ सीरप मामले में विना किसी साक्ष्य के उनकी संलिप्तता बताते हुए अर्नगल आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर भ्रामक वा गलत खबर प्रचारित किया है। जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर आघात पहुंचा। इस मामले में पुलिस ने अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर व एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।



