तेज तर्रार, फुर्तीला और वफादार, दो भारतीय नस्ल के कुत्तें जिन्हें बीएसएफ की के9 यूनिट में मिली जगह

नई दिल्ली/एजेंसी। भातीय नस्ल के दो कुत्तों को देश की सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की के9 यूनिट में सबसे अग्रणी जगह मिली है। इस पहल से देशी नस्ल के कुत्तों का सम्मान बढ़ा है, जो कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बता दें बीएसएफ ने अपनी के9 यूनिट्स में दो प्रमुख भारतीय नस्ल के कुत्तों को शामिल किया है। इसमें पहला है उत्तर प्रदेश का रामपुर हाउंड, जो अपनी तेज रफ्तार और सहनशीलता के लिए जाना जाता है। इस नस्ल को सदियों से नवाबों द्वारा पाला जाता रहा है। विदेशी नस्लों की तुलना में इसके रखरखाव में काफी कम खर्च आता है।
वहीं दूसरी नस्ल कर्नाटक की मुद्होल हाउंड की है। इसका संबंध मराठा से रहा है। मुद्होल हाउंड को राजा मालोजी राव घोरपड़े ने पुनर्जीवित किया था। कुत्तों की ये नस्ल मुख्य रूप से अपनी ताकत और वफादारी के लिए जानी जाती है।
भारत की प्राचीन समृद्ध परंपराओं में देशी नस्ल के कुत्तों का एतिहासिक महत्व रहा है। शताब्दियों से ये कुत्ते राज दरबारों से लेकर युद्ध क्षेत्र में कदम से कदम मिलाते हुए वफादारी का प्रतीक बने हुए हैं।
जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र (एनटीसीडी) का दौरा किया था। उस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कर्तव्यों के लिए भारतीय ‘श्वान’ नस्लों को बढ़ावा देने की बात कही थी।
इसी कड़ी में 30 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ संबोधन में, पीएम मोदी ने लोगों से आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप, भारतीय नस्लों को अपनाने और बढ़ावा देने का आग्रह किया था। इस अपील ने लोगों के दिलों को छुआ और राष्ट्रीय गौरव की एक नई लहर पैदा हुई। यहीं से स्वदेशी नस्ल के कुत्तों की विरासत को पुनर्जीवित करने का एक आंदोलन शुरू हुआ।

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