महाभारत काल के गर्म कुंड का रहस्य खुला, दामोदर से होता है रिचार्ज

लगातार उपयोग से हड्डियां हो सकती हैं टेढ़ी

धनबाद/झारखंड। धनबाद के पंचेत झाेरबूढ़ी गर्म कुंड के सालोंभर लबालब रहने का रहस्य सुलझ गया है। झोरबूढ़ी गर्म कुंड दामोदर नदी से रिचार्ज हो रहा है। निरसा पालिटेक्निक के व्याख्याता और भूगर्भशास्त्री डाॅ. एसपी यादव ने दशकों से अनसुलझे रहस्य को सुलझाया है। अध्ययन में पाया गया कि यह क्षेत्र सोनाटा (सोन-नर्मदा-ताप्ती) के भूगर्भीय दरार वाले क्षेत्र का पूर्वी हिस्सा है। यह मूल रूप से प्रमुख भारतीय भूपर्पटी ब्लाकों के बीच एक भूवैज्ञानिक जोड़ क्षेत्र है, जो गहरी फाल्ट और मैग्माटिक अंतर्प्रवेश को दर्शाता है। गर्म कुंड के जल का भी अध्ययन किया गया। पानी में फ्लोराइड, सोडियम, क्लोरीन व सल्फेट उच्च मात्रा में पाए गए हैं। फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अत्यधिक है। झारबूढ़ी गर्म कुंभ मंदिर से सटे होने से यहां प्रतिदिन लोग स्नान करते हैं। इसकी मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। लोग मानते हैं कि गर्म कुंड में स्नान से चर्म रोग ठीक होते हैं। पर इस जल का नियमित सेवन हड्डियों पर असर डाल सकता है, जिससे शरीर टेढ़ा होने का खतरा रहता है। दांत भी खराब हो सकते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि गर्म कुंड तक नदी का जल डीप फ्रैक्चर से पहुंच रहा है। डीप फ्रैक्चर यानी गहरी दरारों से जल पुनर्भरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पानी जमीन में रिसकर पृथ्वी की सतह के नीचे स्थित गहरी दरार वाली चट्टानी परतों में मौजूद जल भंडारों को भर देता है। झारखंड के रामगढ़ से पश्चिम बंगाल के वक्रेश्वर तक स्थित हैं गर्म कुंड डाॅ. यादव का कहना है कि जमीन के नीचे जैसे-जैसे जाएंगे, ताप बढ़ता जाएगा। जहां दरार होगा, वहां ताप दिखेगा।
भूमिगत जल गुजरने के दौरान दरार वाले हिस्से में उसी ताप के असर से गर्म कुंड दिखता है। झारखंड में रामगढ़ से पश्चिम बंगाल के वक्रेश्वर तक दरार वाली जगहों पर ऐसे कई गर्म कुंड स्थित हैं। निरसा के पांड्रा में स्थित कपिलेश्वर मंदिर की तरह पंचेत के झोरबूढ़ी कुंड को भी महाभारतकालीन माना जाता है। मान्यता है कि पांडव व द्रौपदी वनवास के दौरान झोरबूढ़ी आए थे। द्रौपदी ने इसी गर्म कुंड में स्नान कर मां कात्याानी की पूजा की थी। मां का मंदिर आज भी है।
काशीपुर के राजा ने इस मंदिर में पूजा की शुरुआत की थी। स्थानीय लोगों का मानना है कि मां कात्यायनी के विराजमान स्थल के नीचे से ही कुंड में पानी आता है जो अदृश्य है। औषधीय गुणों से भरपूर टुंडी के चरक खुर्द गांव का गर्म कुंड को चर्म रोगों को ठीक करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। सालोंभर इस कुंड से गर्म निकलता है। प्रकृति की गोद में स्थित गर्म कुंड आस्था व प्राकृतिक उपचार का केंद्र है। इस गर्म कुंड से सालोंभर पानी निकलने के रहस्य को भी सुलझा लिया गया है। इस गर्म कुंड को टुंडी होकर बहने वाली बराकर नदी रिचार्ज करती है। भूगर्भ शास्त्री डाॅ. एसपी यादव कहते हैं, अध्ययन में कुंड के जल के रिचार्ज होने का पता लगाया गया।
उस जल में पीएच-7 से अधिक है। फ्लोराइड भी 7-9 के बीच है, जबकि पीने योग्य पानी में प्रति लीटर 1-1.5 एमजी होना चाहिए। अगर कोई नियमित सेवन करते हैं तो उससे बचना उचित होगा। डीप फ्रैक्चर की मैपिंग की जाए तो गहराई का पता चल सकता है।

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फ्लोराइड युक्त पानी तंत्रिका संबंधी को प्रभावित करती है। यह न्यूरोटाक्सिसिटी और तंत्रिका-सूजन का बड़ा कारण होता है। इसके साथ शरीर में प्रतिरक्षा की कमी, हीमोग्लोबिन का निम्न स्तर, त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं। इसके साथ लंबे समय तक सेवन से दांतों की ऊपरी परत (एनामेल) खराब होना और दांतों में छोटे-छोटे गड्ढे बन जाता है। हड्डियां कमजोर होने लगती है, रीढ़ की हड्डी में अकड़न और चलने में कठिनाई होने लगी है। ऐसे में जरूरी है कि ऐसे पानी को सेवन नियमित तौर पर नहीं की जाए।
-डाॅ. रोहित, जिला आरसीएच पदाधिकारी

 

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