बीजेपी के पहले दिल्ली अध्यक्ष और जनसंघ के दिग्गज नेता प्रो. वी के मल्होत्रा का निधन

राजधानी में एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली के प्रथम मुख्य कार्यकारी पार्षद व दिल्ली भाजपा के प्रथम अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा के निधन पर बुधवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रो. मल्होत्रा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और कहा कि उनका निधन अत्यंत पीड़ादायक और अपूरणीय क्षति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आज उनके निवास पर जाकर श्रद्धेय मल्होत्रा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका निधन अत्यंत पीड़ादायक और अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के सांसद व विधायक भी रहे श्रद्धेय विजय कुमार मल्होत्रा भारतीय जनसंघ और भाजपा की प्रथम पंक्ति के योद्धा थे। उन्होंने न केवल दिल्ली की राजनीति को दिशा दी, बल्कि एक सच्चे जनसेवक के रूप में जनसेवा के नए मानक स्थापित किए। दिल्ली भाजपा के प्रथम अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन की नींव को मजबूत किया और असंख्य कार्यकर्ताओं को सेवा, अनुशासन और समर्पण का मार्ग दिखाया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मल्होत्रा का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, संगठन कौशल और सादगी का जीता-जागता उदाहरण रहा। वह हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए पितृ-तुल्य मार्गदर्शक थे। उनका निःस्वार्थ और समर्पित जीवन हमेशा हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जाना न केवल भाजपा परिवार के लिए बल्कि दिल्ली के सामाजिक और राजनीतिक जीवन के लिए भी एक गहरी शून्यता छोड़ गया है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिवारजनों तथा कार्यकर्ताओं को यह असहनीय दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
यहां यह जानना आवश्यक है कि राजकीय शोक का अर्थ क्या होता है। दरअसल, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर पूरे देश में राजकीय शोक मनाया जाता है। वहीं, राज्यपाल, राज्य के किसी सम्मानित शख्सियत, मुख्यमंत्री या पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर पूरे राज्य में शोक मनाया जाता है। इस दौरान कई तरह की चीजों पर पाबंदी होती है।
राजकीय शोक का एलान होने पर शोक की अवधि के दौरान सरकारी स्कूल, कॉलेज और दफ्तर या सरकारी समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित नहीं होते। साथ ही, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या पूर्व पीएम और राष्ट्रपति के निधन पर पूरे भारत में जहां भी राष्ट्रीय ध्वज नियमित रूप से फहराया जाता है, वहां राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहता है।

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