फतेहपुर में जयराज हत्याकांड की विवेचना में लापरवाही पर सदर कोतवाल और सीओ सिटी नपे

फतेहपुर/उत्तर प्रदेश। जयराज मान सिंह हत्याकांड की विवेचना में लापरवाही बरतने पर सदर कोतवाल और सीओ सिटी पर कार्रवाई की गई है। एसपी अनूप सिंह ने रविवार को विवेचक सदर कोतवाल तारकेश्वर राय को लाइन हाजिर कर दिया। पर्यवेक्षण में शिथिलता बरतने पर सीओ सिटी गौरव शर्मा से सिटी का चार्ज छीन लिया गया। उन्हें सीओ अपराध और डायल 112 के पद पर तैनात किया गया है। गौरतलब है कि शहर में एसपी बंगले के समीप रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व जमींदार परिवार के सदस्य जयराज मान सिंह की 21 जनवरी को गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। वह महर्षि विद्या मंदिर के पास स्थित अपनी बाग की देखरेख के लिए मुंशी अंकित मिश्रा के साथ गए थे। पुलिस ने नामजद तहरीर के आधार पर मुंशी अंकित मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
हत्याकांड को लेकर कई सवाल लगातार उठते रहे जिनके जवाब तलाशने में पुलिस विवेचना कर रही थी। इस हाईप्रोफाइल मामले की मॉनीटरिंग एडीजी और आईजी अजय मिश्रा स्वयं कर रहे हैं। विवेचना की प्रगति और अनसुलझे बिंदुओं को लेकर आईजी ने शुक्रवार को विवेचक सदर कोतवाल और सीओ सिटी को तलब किया था। बैठक के दौरान कई सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिए जा सके। इसके बाद आईजी ने एसपी से भी मामले को लेकर चर्चा की। इसी क्रम में रविवार को कोतवाल को लाइन हाजिर करने और सीओ सिटी से चार्ज हटाने की कार्रवाई की गई।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह को लाइन हाजिर किया गया है। साइबर थाने में ही तैनात निरीक्षक कमर खान को साइबर थाने का प्रभारी निरीक्षक बनाया है। कमर खान पहले साइबर थाने की कमान संभाल चुके हैं। सदर कोतवाली का चार्ज निरीक्षक श्रवण कुमार सिंह को मिला है। वह पुलिस लाइन में तैनात थे। यातायात, अपराध और यूपी 112 के पर्यवेक्षण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे सीओ प्रमोद शुक्ला को सीओ सिटी का प्रभार मिला है। सीओ सिटी प्रमोद शुक्ला जिले में पहले खागा सर्किल की भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
तारकेश्वर राय करीब दो साल से सदर कोतवाली के चार्ज पर थे। उनके सामने कई बड़े मामले आए। इनमें उनकी चूक भी सामने आई इसके बाद भी वह बचते रहे। करीब डेढ़ साल पहले मीडियाकर्मी दिलीप सैनी की हत्या हुई थी। हत्या से पूर्व दिलीप सैनी का विवाद आरोपियों से शांतिनगर स्थित एक नर्सिंग में हुआ था। दिलीप ने पुलिस को मदद के लिए बुलाया था। माना गया कि कोतवाली पुलिस की शिथिल कार्रवाई के चलते वारदात को अंजाम दिया गया। 11 अगस्त 2025 को शहर के आबूनगर इलाके में धार्मिक स्थल को लेकर सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया। इसमें भी कहीं न कहीं जिम्मेदार कोतवाल रहे।

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