कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का दिया नोटिस

नई दिल्ली। कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इसमें 118 सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है।’ प्रियंका गांधी ने दावा किया कि पीएम पर कोई हमला करे सवाल ही नहीं उठता। सरकार द्वारा स्पीकर पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है।
कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या ओम बिरला के खिलाफ लोकसभा में पारित हो पाएगा। लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर क्या नियम हैं? और भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक कितने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। संसद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी को भाषण पूरा करने नहीं दिया गया। लोकसभा में विप के नेता नरवणे की किताब पर बोलना चाहते थे। जिसके बाद हंगामे की वजह से कांग्रेस के 7 सांसद समेत 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया।

लोकसभा स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

  • लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के कार्यप्रणाली नियमों के अनुच्छेद 200 के तहत संचालित होती है।
  • कोई भी सदस्य जो स्पीकर या उप-स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाना चाहता है, उसे लोकसभा महासचिव को लिखित रूप में प्रस्ताव सौंपना पड़ता है।
  • इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे आरोपों को स्पष्ट और सटीक शब्दों में लिखा जाना, जिसमें कोई तर्क, अनुमान, व्यंग्य, आरोप या अपमानजनक बातें शामिल न हों।
  • नोटिस मिलने के बाद, प्रस्ताव पेश करने की अनुमति के लिए संबंधित सदस्य के नाम पर कार्यसूची में शामिल किया जाता है।
  • प्रस्ताव की चर्चा के लिए तारीख तय की जाती है, जो नोटिस की तिथि से कम से कम 14 दिन बाद होती है।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव को कम से कम 50 सदस्यों (सांसदों) का समर्थन प्राप्त होना चाहिए, अन्यथा यह गिर जाता है।
  • आमतौर पर, प्रस्ताव स्वीकार होने के 10 दिनों के भीतर बहस और मतदान होता है। जब प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो स्पीकर या उप-स्पीकर अध्यक्षता नहीं कर सकते।
  • अंत में, प्रस्ताव को सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित होना जरूरी है।

इतिहास में स्पीकर के खिलाफ कितने अविश्वास प्रस्ताव?

लोकसभा के इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अब तक तीन प्रमुख अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाए।

  • पहला मामला 18 दिसंबर 1954 का है, जब तत्कालीन स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव आया, लेकिन बहस के बाद सदन ने इसे खारिज कर दिया।
  • दूसरा 24 नवंबर 1966 में हुकम सिंह के खिलाफ लाया गया, जो 50 सदस्यों के समर्थन की कमी के कारण गिर गया।
  • तीसरा 15 अप्रैल 1987 में बलराम जाखड़ के विरुद्ध था, जिसे बहस के बाद अस्वीकार कर दिया गया।

इसके अलावा, 1967 में डॉ नीलम संजीव रेड्डी, 2001 में जीएमसी बालयोगी, 2011 में मीरा कुमार और 2020 में ओम बिरला के खिलाफ नोटिस की चर्चाएं जोरों पर रहीं, लेकिन ये कभी अमल में नहीं आए।

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