दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर आनंद विहार आईएसबीटी से हटेगा अतिक्रमण

दोबारा दुकानें लगाने से रोकना होगी असली परीक्षा

पूर्वी दिल्ली। सड़कों और फुटपाथ पर अतिक्रमण राजधानी दिल्ली के लिए कलंक बनता जा रहा है। छोटी सी समस्या इतना बड़ा दंश बन चुकी है कि अब अतिक्रमण हटवाने के लिए भी हाई कोर्ट जैसी बड़ी संस्था को हस्तक्षेप करना पड़ा है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब निगम यहां से अतिक्रमण हटाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अतिक्रमण हटने के बाद दोबारा न लगने देना एमसीडी और दिल्ली पुलिस दोनों के लिए बड़ी चुनौती होगी। यूपी से आने वाले लोगों के लिए दिल्ली का प्रवेश द्वार आनंद विहार आईएसबीटी लंबे समय से अतिक्रमण की महामारी से जूझ रहा है। बस अड्डे के अलावा मेट्रो, रेलवे और रैपिड ट्रेन का स्टेशन होने के चलते यह दिल्ली का सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब बन गया है।
लेकिन इसके बाद लगी ठेली पटरी और अवैध दुकानें इसे दिल्ली का सबसे बड़ा जाम प्वाइंट बना देती हैं। पिछले दिनों दिल्ली पुलिस ने इसे जीरो टालरेंस जोन बनाकर अवैध पार्किंग तो हटा दीं लेकिन अवैध दुकानें ज्यों की त्यों लगी हैं। बुधवार को दैनिक जागरण की टीम यहां पहुंची तो एंट्री से लेकर एग्जिट गेट तक लगभग 80 दुकानें तो बाहर ही लगी थीं। बस अड्डा के आसपास लगभग 350 से 400 अवैध दुकानों अलावा फुटओवर ब्रिज पर भी दुकान चलाने वालों का कब्जा दिखाई दिया।
अतिक्रमण को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद नगर निगम के सामने एक बार फिर कार्रवाई की तैयारी है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि हटाए जाने के बाद दोबारा दुकानें न लगें। कोर्ट ने एमसीडी को निर्देश दिए हैं कि आईएसबीटी परिसर में केवल करीब 105 दुकानों को ही लगाने की अनुमति दी जाए, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यहां रोजाना लगभग 400 दुकानें लगती हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अतिक्रमण एमसीडी और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से वर्षों से फल-फूल रहा है। सड़क किनारे, फुटपाथ और आईएसबीटी के आसपास अस्थायी दुकानों की भरमार से पूरा इलाका अव्यवस्थित हो चुका है। बस अड्डे पर आने-जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शाहदरा दक्षिणी जोन के उपायुक्त बादल कुमार ने बताया कि जून 2017 से यहां पर कार्रवाई को लेकर कोर्ट का स्टे था। इसके चलते कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। पिछले दिनों उनके पास लोगों ने शिकायत की तो इसका संज्ञान लेते हुए गत 17 जनवरी को स्टे वैकेट करवाने के लिए कोर्ट में आवेदन किया था।
उसी आवेदन पर कोर्ट ने कार्रवाई का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 105 दुकानदारों के अलावा सभी पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए रूपरेखा तैयार कर ली गई है। साथ ही दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए भी प्लानिंग कर ली गई है।
स्थानीय विधायक ओमप्रकाश शर्मा का कहना है कि वह अधिकारियों को लगभग 50 बार लिखित में दे चुके हैं। इसके अलावा खुद कई बार मौके पर जाकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए, लेकिन न तो पुलिस और न ही नगर निगम के अधिकारी गंभीरता से सुनवाई करते हैं। उनका आरोप है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी।
अतिक्रमण के कारण आनंद विहार आईएसबीटी, कौशांबी और आसपास की सड़कों पर रोजाना लंबा जाम लगता है। पीक आवर्स में बसों, आटो और निजी वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होती है। कई बार आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस जाते हैं। फुटपाथ पर दुकानों के कब्जे के चलते पैदल यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ता है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी बन चुकी है।

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