जानें मुंबई लालबागचा राजा का अद्भुत इतिहास, मछुआरे समुदाय ने रखी थी नींव

मुंबई डेस्क। गणेश चतुर्थी का पर्व हिंदू धर्म का एक पावन त्योहार है। इस पर्व को महाराष्ट्र में श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस पावन पर्व के मौके पर मुंबई में 10 दिनों तक भव्य गणेश उत्सव का आयोजन होता है। इस पर्व में आकर्षण का मुख्य केंद्र लालबागचा राजा होते हैं। जिनकी ख्याति देश-विदेशों में भी है। इस पर्व को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस शुभ मौके पर लाल बाग में स्थापित गणपति बप्पा की विशाल मूर्ति की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।
लाल बाग के राजा हैं विश्व प्रसिद्ध
बता दें कि मुंबई के सबसे लोकप्रिय और फेमस गणेश पंडाल को लालबागचा राजा के नाम से जाना जाता है। जोकि सेंट्रल मुंबई के लालबाग बाजार के पास स्थित है। इस पंडाल में देवाधिदेव महादेव के पुत्र भगवान श्रीगणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान लालबाग का नजारा बेहद मनोरम दिखता है। इस पंडाल में स्थापित होने वाली भगवान गणेश की मूर्ति नवसाचा गणपति के नाम से जानी जाती है। गणपति बप्पा का यह स्वरूप सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाला होता है। यही कारण है कि लाल बागचा राजा को मन्नत का भी राजा कहा जाता है। कोली समुदाय के मछुआरों ने साल 1934 में इस परंपरा की शुरूआत की थी।
गणपति बप्पा का स्वरूप
लालबाग में विराजमान विघ्नहर्ता की अद्वितीय और आकर्षक मूर्ति 18-20 फीट ऊंची है। यह श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र है। लालबाग के राजा के इस स्वरूप को पेटेंट करवा लिया गया है। गणपति बप्पा की इस मूर्ति का निर्माण करने की जिम्मेदारी करीब 89 सालों से कांबली परिवार संभाल रहा है। भगवान गणेश के इन अनोखे स्वरूप में मूर्ति के चेहरे को थोड़ा पतला बनाया जाता है। इस दौरान गणपति बप्पा सिंहासन पर बैठे नजर आते हैं।
हर धर्म के लोग करते हैं दर्शन
लालबाग में जात-पात और धर्म के भेदभाव से अलग सभी लोग भगवान गणेश के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने जाते हैं। लालबागचा राजा का आशीर्वाद लेने और दर्शन करने के लिए कई फेमस हस्तियां पहुंचती हैं। इस दौरान बॉलीवुड के एक्टर्स और अंबानी परिवार के लोग भी आते हैं। इस दस दिवसीय महोत्सव के दौरान पूरी मुंबई नगरी भगवान गणेश की भक्ति में डूबी नजर आती है।

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