तुर्की के गांव में उग रहे योगी जैसे फ्लावर, मौसम के साथ बदलते है रंग

Yogi-like flowers are growing in a village in Türkiye, their colors change with the seasons

तेल अवीव/एजेंसी। तुर्की के बताए जा रहे एक फूल की तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही हैं। ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है, जिसे योगी फ्लावर कहा जा रहा है। दरअसल इस फूल की बनावट ऐसी है, जैसे कोई योग की मुद्रा यानी पद्मासन में बैठा हो। ऐसे में इस तस्वीर को शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि ये दुर्लभ फूल केवल हलफेती गांव में होते हैं, जो कि तुर्की के दक्षिण-पूर्वी सान्ल इरफा प्रांत के पास है।इस फूल के बारे में दावा किया जा रहा है कि हलफेती गांव की मिट्टी के अनूठे गुणों और एंथोसायनिन पिगमेंट की वजह से ये फूल गर्मियों में काले और दूसरे मौसमों में गहरे लाल दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स दावा कर रहे हैं कि तुर्की दुनिया में एकमात्र ऐसी जगह है, जहां योगी फूल उगते हैं। हालांकि इन दावों में पूरी तरह से सच्चाई नहीं है।
सोशल यूजर्स ने तरह तरह के दावे इस फूल के बारे में किए हैं। एक दावा कहता है कि ये यूफ्रेट्स के पानी से पोषित होते हैं। इस फूल को पैदा करने वाली मिट्टी के बारे में कहा गया है कि मिट्टी के गुणों की वजह से फूल रंग बदलता है। इस फूल की तस्वीर पर तमाम दावे हैं लेकिन इसका सच कुछ और ही है। नेचुरल योगी फ्लावर के बारे में किए जा रहे दावों की पड़ताल न्यूज आउटलेट ‘फैक्टली’ ने की है।
पड़ताल में पता चला कि जो तस्वीर वायरल छवि एआई तकनीक की मदद से बनी है। तुर्की में ‘योगी फ्लावर’ नाम का कोई फूल उगाता ही नहीं है। रिपोर्ट में पता चला है कि ये तस्वीर यह 99.9 प्रतिशक एआई-जनरेटेड हो सकती है। एक तरफ ये फोटो फेक मिली तो वहीं इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिला जो ये पुष्टि करता हो कि तुर्की के हल्फेटी में ‘योगी फ्लावर’ नाम का फूल खिलता है।
योगी फ्लावर के बारे में दावा तो सच नहीं है लेकिन तुर्की के हल्फेटी में खूबसूरत गुलाब जैसे फूल उगते हैं, जिनको ‘कारा गुल’ के नाम से जाना जाता है। ये गुलाब गहरे वाइन-लाल रंग में खिलते हैं और गर्मियों में कलियों की तरह काले दिखाई देते हैं। फैक्टली ने एक रिपोर्ट में कहा कि उन्हें विशिष्ट पीएच स्तर की आवश्यकता होती है। इससे ये गर्मियों में काले होते हैं और दूसरे मौसमों में रंग बदल देते हैं। स्थानीय लोग इन गुलाबों की खेती करते हैं और पर्यटक भी इन्हें देखने हल्फेटी पहुंचते हैं।

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