पाकिस्तान में घुसेगी भारतीय सेना, टारगेट पर जैश का हेडक्वार्टर!

पाकिस्तान कैसा देश है जो बातों से नहीं मानता और उसका एक ही इलाज है घर में घुसकर पिटाई। इसका तरीका भी एक ही है सर्जिकल स्ट्राइक जो पाकिस्तान पहले भी झेल चुका है। पाकिस्तान के पाले आतंकियों ने जम्मू कश्मीर में एक बार फिर से दहशत फैलाने की कोशिश की है। कठुआ आतंकी हमले में सेवा के पांच जवान शहीद हो गए हैं। ऐसा टंकी हमले के बाद कुछ सबूत हाथ लगे हैं जिससे पता चलता है कि कैसे जीना पाकिस्तान के इशारे पर जम्मू कश्मीर में आतंकवादी हमला हुआ। आतंकियों ने हमले के लिये दशकों पुराना रास्ता अपनाया। सुरक्षा बलों पर हमला भारत में कभी बर्दाश्त नहीं किया है। साल 2016 में उरी आतंकवादी हमला हुआ जिसके जवाब में भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की। साल 2019 में पुलवामा में आतंकवादी हमला हुआ जिसके जवाब में बालाकोट एयर स्ट्राइक हुई। अब कठुआ में आतंकी हमला हुआ है। ऐसे में चर्चा तेज हो चली है कि क्या पाकिस्तान में फिर से सर्जिकल स्ट्राइक 3.0 होने वाला है?
जैश के हेडक्वार्टर पर स्ट्राइक 3.0
रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने कहा कि कठुआ हमले में पांच जवानों की मौत का बदला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत इसके पीछे छिपी बुरी ताकतों को परास्त करेगा। हमले के बाद कड़ा संदेश देते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि देश इन जवानों के बलिदान को हमेशा याद रखेगा और उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. कठुआ की कायराना हरकत पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भड़के और कहा कि आतंकियों के खिलाफ सेना का ऑपरेशन रुकने वाला नहीं है। यह किसी से छिपा नहीं है कि इन आतंकी संगठनों को पड़ोसी देश पाकिस्तान से किस तरह समर्थन मिलता है। 2019 में भारत ने ऐसे ही हमले (पुलवामा हमले) के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को सबक सिखाया था।
‘यह नया भारत है, आतंकवाद के घाव नहीं सहता
अभी कुछ महीने पहले की ही बात है, चुनाव से पहले, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यह नया भारत है और यह आतंकवाद के घाव नहीं सहता. मोदी सरकार के पिछले दो कार्यकाल के दौरान जब भी पाकिस्तान ने बातचीत की बात की तो सरकार ने साफ कर दिया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। हाल के वर्षों में सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों पर कड़ा प्रहार किया है। सीमा पर चौकसी बढ़ गई है और अब आतंकी आसानी से भारतीय सीमा में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान की नापाक कोशिशें जारी रहती हैं और कई बार वो घुसपैठ में कामयाब भी हो जाते हैं। ऐसा एक बार फिर हुआ है।

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