मजहब से दूर इंसानियत का सबक सिखाती है मूवी बजरंग और अली

The movie Bajrang and Ali teaches the lesson of humanity away from religion

इस हफ्ते चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज हुई बजरंग और अली नई स्टारकास्ट के साथ सीमित बजट ने बनी एक ऐसी साफ सुथरी फिल्म है जिसे बॉलीवुड के नामी मेकर्स और महंगे स्टार्स के साथ कभी नहीं बनाएंगे लेकिन तारीफ करनी होगी इस फिल्म के मेकर्स और यंग डायरेक्टर जयवीर की जिन्होंने ऐसी बेहतरीन फिल्म जो आज के माहौल में सो फीसदी फिट बैठती है।
मुझे यह फिल्म देखने के बाद लगा काश इस फिल्म को मेकर्स पिछले महीने की शुरुआत में रिलीज करते तो धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओ के परदे से नकाब उठाने का काम करती। निर्देशक जयवीर ने दोस्ती के माध्यम से दर्शकों को नफरत की दीवार को तोड़ कर भाईचारे का संदेश दिया है ।
स्टोरी प्लॉट
इस फ़िल्म की कहानी दो अलग-अलग धर्म से संबंध रखने वाले काशी के एक हनुमान मंदिर के युवा पुजारी बजरंग और नजदीक ही बनी एक मस्जिद के इमाम के छोटे बेटे अली की है काशी के रीयल लोकेशन पर स्टार्ट टू फिनिश शूट बजरंग और अली एक दिल को छूने वाली कहानी है जो आपकी अपने साथ बांधने का दम रखती है मंदिर का युवा पुजारी बजरंग मस्जिद में होने वाली अजान अच्छी देता है तो अली हनुमान चालीसा का पूरा पाठ करता है तो मंदिर के पास आयोजित रामलीला में रावण का किरदार निभाता है। मेरी नजर में यह फ़िल्म मनोरंजन के साथ साथ हिंदू मुस्लिम भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव रखने की सीख देती है यंग राइटर डायरेक्टर हीरो जयवीर ने फिल्म का निर्देशन करने के साथ साथ बजरंग का लीड किरदार भी पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है ,वहीं अली के किरदार में सचिन पारिख की एक्टिंग का जवाब नहीं। फिल्म के अन्य कलाकारों में सुरिद्धि गुप्ता, युगांत बद्री पांडे और गौरी शंकर सिंह आदि अपने अपने किरदार में फिट रहे। अगर आप अच्छी साफ सुथरी और समाज को सार्थक संदेश देती फिल्मों को पसंद करते है तो डायरेक्टर , हीरो जयवीर की इस फिल्म को एकबार जरूर देखे।

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